कश्मीर पर तुर्की राष्ट्रपति के बयान पर भारत का करारा जवाब- हमारे आंतरिक मामले में दखल न दें

पाकिस्तान दौरे पर पहुंचे तुर्की (Turkey) के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान ने भारत के खिलाफ जहर उगला। कश्मीर मामले पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि यह तुर्की के लिए भी उतनी ही अहमियत रखता है जितनी पाकिस्तान के लिए। भारत ने कश्मीर पर तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान (Recep Tayyip Erdogan) की टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

Recep Tayyip Erdogan
तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान।

पाकिस्तान दौरे पर पहुंचे तुर्की (Turkey) के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान (Recep Tayyip Erdogan) ने भारत के खिलाफ जहर उगला। कश्मीर मामले पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि यह तुर्की के लिए भी उतनी ही अहमियत रखता है जितनी पाकिस्तान के लिए। भारत ने कश्मीर पर तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान (Recep Tayyip Erdogan) की टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारत ने कहा कि वह भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप ना करें। साथ ही तुर्की के नेताओं को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के लिए कहा गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने 15 फरवरी को कहा कि जम्मू-कश्मीर को लेकर तुर्की के राष्ट्रपति द्वारा दिए गए सभी संदर्भों को भारत खारिज करता है।

भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करे तुर्की

रवीश कुमार ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है जो उससे कभी अलग नहीं हो सकता। जम्मू-कश्मीर पर एर्दोगान (Recep Tayyip Erdogan) की टिप्पणी के संदर्भ में कुमार ने कहा,”भारत जम्मू-कश्मीर के संबंध में दिए गए सभी संदर्भों को खारिज करता है। वह भारत का अभिन्न अंग है, जो उससे कभी अलग नहीं हो सकता।” उन्होंने आगे कहा, “हम तुर्की नेतृत्व से अनुरोध करते हैं कि वह भारत के लिए पाकिस्तान से पैदा होने वाले आतंकवाद के खतरे सहित सभी तथ्यों की सही समझ विकसित करे। साथ ही भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करे।”

विदेशी शासन के खिलाफ तुर्कों की लड़ाई से की थी तुलना

बता दें कि एर्दोगान (Recep Tayyip Erdogan) ने 14 फरवरी को पाकिस्तानी संसद में अपने संबोधन में “कश्मीरियों के संघर्ष की तुलना प्रथम विश्व युद्ध के दौरान विदेशी शासन के खिलाफ तुर्कों की लड़ाई” से की थी। एर्दोगान ने पाकिस्तान की संसद में संयुक्‍त सत्र को संबोधित करते हुए कहा था, “हमारे कश्मीरी भाई-बहन दशकों से बहुत कुछ झेल रहे हैं।” इस दौरान उन्‍होंने बिना भारत का नाम लिए कहा कि हाल में उठाए गए एकतरफा कदमों की वजह से उनकी पीड़ा और बढ़ गई है। कश्मीर का मुद्दा संघर्ष या दमन के जरिए नहीं सुलझाया जा सकता है। इस मसले को न्याय और पारदर्शिता से ही हल किया जा सकता है। इस तरह से निकाला गया समाधान ही सभी पक्षों के हित में होगा।

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