अपने फैसले पर अटल हैं गृहमंत्री, कहा- CAA पर एक इंच भी नहीं हटेंगे पीछे

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केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने CAA के खिलाफ हो रहे दुष्प्रचार पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दल वोट बैंक की राजनीति कर लोगों को गुमराह कर रहे है। इस कानून में कहीं भी किसी की नागरिकता लेने का कोई प्रावधान नहीं है और इससे किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है।

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अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस और अन्य कुछ विपक्षी दल वोट बैंक की राजनीति के लिए CAA के खिलाफ दुष्प्रचार का अभियान शुरू कर देश की जनता को गुमराह कर रहे हैं और प्रदर्शन कर रहे है। ये लोग लोकतंत्र के हितों के खिलाफ जा रहे है जबकि हम जनजागरण अभियान के तहत जनता के पास जाकर CAA के बारे में अपना पक्ष रखेंगे। शाह ने शरणार्थियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे डरे नहीं, बीजेपी इस मामले में एक इंच भी पीछे हटने वाली नहीं हैं और उनकी नागरिकता को कोई नहीं रोक सकता है, चाहे विपक्ष की सारी पार्टियां एक हो।

शाह ने कहा कि वह कांग्रेस, ममता बेनर्जी , समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजवादी पाटी, अरविंद केजरीवाल और लेफ्ट पार्टी सहित कई पार्टियों को चुनौती देने आये है कि वे कह रहे हैं कि इस कानून से देश के अल्पसंख्यकों की नागरिकता चली जायेगी, राहुल ने अगर कानून पढा है तो इस बारे में कहीं भी चर्चा पर आ जाये, नहीं पढा है तो इटली में अनुवाद करके दे देते है, पढ लीजिए। शाह ने कहा “मैं जनता से कहना चाहता हूं, CAA के अंदर कहीं भी किसी की नागरिकता लेने का कोई प्रावधान नहीं है, इसमें केवल नागरिकता देने का प्रावधान है, यह बताने आया हूं।”

शाह ने कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ्गानिस्तान में अल्पसंख्यक जैन, सिख, बौद्ध, पारसी आदि प्रताड़ित होकर भारत आने वाले शरणार्थियों को नागरिकता देने का यह कानून है। शाह ने कहा कि महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू जैसे हमारे नेता पहले ही कह चुके है कि ऐसे लोगों को नागरिकता देनी चाहिए, तो क्या वे भी सांप्रदायिक थे।

अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने वोट बैंक के डर से हिम्मत नहीं कर रही थी जबकि 56 इंच के सीना वाले नरेन्द्र मोदी ने लाखों, करोड़ों शरणार्थियों के मानवाधिकारों की रक्षा करने की ठानी और इसके लिए नागरिकता संशोधन बिल संसद में पारित कराया। इससे आज जो शरणार्थी बैठे हैं उनके अच्छे दिन आ गये कि वह देश के नागरिक बनने वाले है। शाह ने कहा कि उनके नागरिक बनने से उनका उतना ही अधिकार है जितना मेरा है। किसी को डरने की जरूरत नहीं है।

शाह ने कहा कि वह इस कानून का विरोध कर रहे लोगों से पूछना चाहते हैं कि गांधी, नेहरू, पटेल, मनमोहन इन लोगों को नागरिकता देने के बारे में कह चुके है और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पूर्व में तीन-तीन चिट्ठी लिखी है। अब नागरिकता देने की बारी आई तो अशोक गहलोत की हिम्मत नहीं हो रही है। शाह ने कहा कि अशोक गहलोत को अस्पताल में बच्चों की मौत के बारे में चिंता करनी चाहिए।

शाह ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक 20 फीसदी से घटकर 3 फीसदी पर आ गये तथा बांग्लादेश में 30 फीसदी से घटकर 7 फीसदी रहे गये। शाह ने कहा कि वो ममता से पूछना चाहते है कि ये लोग कहां गये, मार दिये या धर्म परिवर्तन कर दिये गये। शाह ने कहा कि इनके साथ प्रताड़ना हुई, क्या यह मानवाधिकार का बड़ा उल्लंघन नहीं है। शाह ने कहा कि इन लोगों के माता एवं बहनों की इज्जत लूटी, जबरन निकाह कर लिए गये जबकि देश में सत्तर साल में सरकारें आती रही लेकिन किसी भी सरकार ने इनकी चिंता नहीं की और वर्ष 2019 में नरेन्द्र मोदी ने फिर से प्रधानमंत्री बनते ही यह सब कर दिखाया। शाह ने कहा कि उनकी केन्द्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर वर्षों से जो काम नहीं होने की बात की जा रही थी वह करके दिखाया। आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हवाई कार्रवाई सर्जिकल स्ट्राइक की।

इतिहास में आज का दिन – 4 जनवरी

अमित शाह ने कहा कि गुजरात, राजस्थान, पंजाब तथा अन्य जगहों पर आये शरणार्थियों में 70 फीसदी से ज्यादा दलित लोग शामिल हैं। शाह ने कहा कि जो इस कानून का विरोध कर रहे है वे दलितों का विरोध कर रहे है। शाह ने कहा कि वह ममता से पूछना चाहेंगे कि बंगाली दलितों, एवं हिन्दुओं ने उनका क्या बिगाड़ा है, आप क्यों विरोध कर रही है। शाह ने शरणार्थियों को विश्वास दिलाते हुए कहा कि उन्हें ममता से डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वह भला नहीं चाहती और अपना वोट बैंक संभालना चाहती है।

शाह ने कहा कि विपक्षी दल CAA को लेकर दंगे और जनता को गुमराह करना चाह रह हैं लेकिन लोकतंत्र में जनता को गुमराह करना इतना सरल नहीं है। शाह ने बताया कि बीजेपी कानून के समर्थन में देश में जनजागरण अभियान चलायेगी और पांच जनवरी से देश भर में घर-घर जाकर लोगों को कानून के बारे में समझायेगी। वह 3 करोड़ से अधिक लोगों के घर जायेगी तथा 500 से अधिक सभा कर लोगों अभियान से जोड़ेगी।

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