आतंकी मुठभेड़ में CRPF जवान कुलदीप उरांव शहीद, दो महीने में झारखंड के इस जिले का तीसरा लाल कुर्बान

शहीद के पिता ने कहा, ‘मैं खुद सीआरपीएफ से रिटायर्ड हूं और मुझे अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। वह अमर रहेगा। अगर मेरे और भी बेटे होते तो मैं उनको भी देश की सेवा में ही लगाता।’

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झारखंड के दवान कुलदीप उरांव शहीद।

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में गुरुवार की रात हुई आतंकी मुठभेड़ में सीआरपीएफ जवान कुलदीप उरांव शहीद हो गए। दो महीने के भीतर झारखंड के साहिबगंज जिले के तीन वीर बेटों ने देश के लिए कुर्बानी दी है।

हेड कांस्टेबल कुलदीप उरांव, झारखंड के साहिबगंज के रहने वाले थे। बता दें कि शहीद कुलदीप उरांव सीआरपीएफ के 118 बटालियन के हेड कांस्टेबल और क्विक टीम के सदस्य के रूप में तैनात थे।

शहीद कुलदीप उरांव का पूरा परिवार पुलिस और सेना से संबंध रखता है। कुलदीप की पत्नी वंदना उरांव पश्चिम बंगाल पुलिस में सिपाही के पद पर कार्यरत हैं और अभी 24 परगना जिले में कार्यरत हैं। कुलदीप के पिता घनश्याम उरांव भी सीआरपीएफ में जवान थे, जहां से 2007 में रिटायर हुए थे। शहीद कुलदीप के परिवार में उनके पिता घनश्याम, उनकी पत्नी वंदना और दो बच्चे यश उरांव (9 साल) और वैसी उरांव (5 साल) हैं।

गुरुवार को कुलदीप की शहादत की खबर मिलते ही पूरे परिवार में मातम का माहौल छा गया। पिता घनश्याम उरांव ने बताया कि गुरुवार रात 11 बजे सीआरपीएफ के 118वीं बटालियन के असिस्टेंट कमांडेंट ने फोन कर बेटे के शहीद होने की सूचना दी। घनश्याम के अनुसार, असिस्टेंट कमांडेंट ने बताया कि उनका बेटा कुलदीप उरांव आतंकवादी मुठभेड़ में शहीद हो गया है। मुठभेड़ श्रीनगर के मालबाग में हुई थी। इसमें जवानों ने एक आतंकी को मार गिराया था।

शहीद के पिता ने बताया कि कुलदीप से आखिरी बातचीत बीते बुधवार की रात हुई थी। उन्होंने कहा, ‘मैं खुद सीआरपीएफ से रिटायर्ड हूं और मुझे अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। वह अमर रहेगा। अगर मेरे और भी बेटे होते तो मैं उनको भी देश की सेवा में ही लगाता।’

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