राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की दीवारों पर दर्ज होगा स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना का नाम

वायुसेना ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर जवानों की सूची में स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना (Squadron Leader Ravi Khanna) के नाम को शामिल करने की मंजूरी दे दी है। स्क्वाड्रन लीडर एक आतंकी हमले में शहीद हो गए थे। शहादत के 29 साल बाद उन्हें शहीद का दर्जा मिला है। सूत्रों के मुताबिक, ‘वायुसेना मुख्यालय ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के वायुसेना जवानों की सूची में स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना के नाम को शामिल करने की मंजूरी प्रदान कर दी है।’ सितंबर के अंतिम सप्ताह में वायुसेना अधिकारियों द्वारा यह निर्णय लिया गया था।

Squadron Leader Ravi Khanna
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक

स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना (Squadron Leader Ravi Khanna) के नाम को मंजूरी दिए जाने पर उनकी पत्नी निर्मल खन्ना ने वायुसेना का शुक्रिया अदा किया है। स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना (Squadron Leader Ravi Khanna) की पत्नी ने कहा कि एक सैनिक लंबे समय तक और क्या कर सकता है? जब कोई सैनिक वर्दी पहनता है, तो वह जानता है कि यह एक ताबूत है। मैं भारतीय वायुसेना और 130 करोड़ भारतीयों की शुक्रगुजार हूं। दरअसल, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की दीवारों पर विभिन्न अभियानों में मारे गए सभी रक्षा कर्मियों के नाम दर्ज हैं। इसमें उनके साहस की गाथा का भी वर्णन है। गौरतलब है कि 25 जनवरी, 1990 के दिन वायुसेना के कुछ अधिकारियों पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया था।

इस हमले में वायुसेना के दो अधिकारियों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि दो अधिकारियों ने इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया था। इस हमले में शहीद होने वाले वासुसेना के अधिकारियों में स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना (Squadron Leader Ravi Khanna) भी शामिल थे। इसी मामले में 31 अगस्त, 1990 को सीबीआई ने टाडा कोर्ट में यासीन मलिक के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया था। आतंक के वित्त पोषण मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) द्वारा गिरफ्तार किया गया मलिक फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है। उसे वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से विशेष अदालत में पेश किया जाता है।

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पति को न्याय दिलाने और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर उनके नाम को लेकर रवि खन्ना (Squadron Leader Ravi Khanna) की पत्नी निर्मल खन्ना ने कड़ा संघर्ष किया। जम्मू निवासी निर्मल की शादी 10 सितंबर, 1978 को अमृतसर के रवि से हुई थी। 1987 में रवि को स्टाफ कालेज ट्रेनिंग के लिए चुना गया था, जिसके चलते कश्मीर घाटी में उनको तैनाती मिली। 25 जनवरी, 1990 को आतंकियों ने रवि की हत्या कर दी। पति की मौत के 10 महीने के अंदर अमृतसर में रहने वाले उनके माता-पिता का निधन हो गया। निर्मल कहती हैं कि मुझे दो छोटे बच्चों के साथ बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लगभग साढ़े चार साल तक पेंशन के बिना गुजारा करना पड़ा, लेकिन मैंने अपनी पूरी लड़ाई लड़ी।

निर्मल ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास था कि न्याय मिलने से पहले उनकी आंखें बंद नहीं होंगी। कुछ दिनों पहले राज्‍यसभा के सांसद राजीव चंद्रशेखर ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से स्‍क्‍वाड्रन लीडर रवि खन्‍ना (Squadron Leader Ravi Khanna) का नाम राष्‍ट्रीय युद्ध स्‍मारक में शामिल करने का अनुरोध किया था। निर्मल खन्‍ना पिछले तीन दशक से न्‍याय के लिए लड़ रही हैं। निर्मल खन्‍ना उस हत्‍या कांड की गवाह हैं। उन्‍होंने बताया था कि उनके पति के शरीर में यासीन मलिक ने 27 गोलियां मारी थीं। पिछले 29 सालों से मैं न्‍याय के लिए लड़ रही हूं, लेकिन इस दिशा में अब तक सरकार असफल रही है। रिपोर्ट में दावा गया था कि यासीन मलिक मौके पर हथियारों से लैस होकर हीरो-होंडा मोटर साइकिल और मारुति जिप्‍सी से पहुंचा था।

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