Bhagat Singh

शहीद -ए-आज़म भगत सिंह (Bhagat Singh) की जिंदगी से जुड़ी ऐसी कहानियां जो प्रेरणा का स्रोत हैं। भगत सिंह के जीवन के तमाम पहलुओं की कहानी संजीव श्रीवास्तव की ज़ुबानी।

खुद को देशभक्ति के जज्बे से भरने के लिए उनका नाम ही काफी है। अंग्रेजों के बढ़ते हुए अत्याचार से सबसे पहले भगत सिंह ने लौहार में सांडर्स की गोली मार कर हत्या कर दी।

शहीद -ए-आज़म भगत सिंह की जिंदगी से जुड़ी ऐसी कहानियां जो प्रेरणा का स्रोत हैं। भगत सिंह के जीवन के तमाम पहलुओं की कहानी संजीव श्रीवास्तव की ज़ुबानी।

फांसी से ठीक पहले लिखे अपने आखिरी पत्र में भगत सिंह ने लिखा, ‘मैं एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूं कि कैद होकर या पाबंद होकर न रहूं।'

भगत सिंह और उनके साथी बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल, 1929 को सेंट्रल असेम्बली के अंदर बम फेंका। बम फेंकने के अपराध में सरदार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 7 अक्तूबर, 1930 को फांसी की सजा सुना दी गई।

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