Republic Day 2020: इस बार देश के कई गुमनाम नायकों को भी मिला पद्मश्री

चंड़ीगढ़ स्थित पीजीआई अस्पताल के बाहर मरीजों एवं उनके साथ आए लोगों को निःशुल्क भोजन कराने वाले जगदीश लाल आहूजा‚ 25,000 से अधिक लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने वाले फैजाबाद के मोहम्मद शरीफ‚ मुस्लिम भजन गायक मुन्ना मास्टर और असम में हाथियों के चिकित्सक कुशल कंवर सरमा उन गुमनाम नायकों में शामिल हैं जिन्हें इस साल पद्मश्री (Padma Shri) से सम्मानित किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की गई जिनमें जम्मू–कश्मीर के दिव्यांग सामाजिक कार्यकर्ता जावेद अहमद टक भी शामिल हैं‚ जो दो दशक से दिव्यांग बच्चों के लिए काम कर रहे हैं‚ अनंतनाग एवं पुलवामा के 40 गांवों में 100 से अधिक बच्चों को निःशुल्क शिक्षा एवं अन्य सहायता मुहैया करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि औपचारिक शिक्षा नहीं लेने के बावजूद पौधों की विविध किस्मों के विशाल ज्ञान के कारण ‘वन की विश्वकोष’ उपाधि से जानी जाने वाली कर्नाटक की 72 वर्षीय तुलसी गौड़ा को भी इस पुरस्कार (Padma Shri) से नवाजा गया है।

अधिकारियों ने बताया कि पिछले चार दशकों से पूर्वोत्तर राज्यों के दूरदराज के इलाकों में शिक्षा एवं पाठन संस्कृति को प्रोत्साहित कर रहे और ‘अंकल मूसा’ के नाम से विख्यात अरुणाचल प्रदेश के सत्यनारायण मुंदायूर‚ 1984 भोपाल गैस त्रासदी के पीडितों की खातिर लड़़ाई लड़़ने वाले अब्दुल जब्बर उर्फ ‘भोपाल की आवाज’ (मरणोपरांत) और राजस्थान में स्वच्छता के क्षेत्र में काम करने वाली दलित सामाजिक कार्यकर्ता ऊषा चौमार को पद्मश्री (Padma Shri) से सम्मानित किया गया है।

इसमें कहा गया है कि सूखाग्रस्त हिवरे बाजार में भूजल में सुधार करने के लिए अहमदनगर (महाराष्ट्र) के प्रख्यात पोपटराव पवार‚ गरीबों को किफायती शिक्षा देने में मदद करने वाले कर्नाटक के 64 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता हारेकला हाजब्बा‚ चिकित्सक अरुणोदय मंड़ल‚ ओडि़शा में बंजर भूमि को वन क्षेत्र में तब्दील करने वाले गांधीवादी राधा मोहन एवं उनकी पुत्री साबरमती को भी पद्मश्री (Padma Shri) से नवाजा गया।

हल्दी की खेती संबंधी मुहिम चलाने वाले मेघालय के आदिवासी किसान त्रिनिती साइऊ‚ असम की बराक घाटी में कैंसर मरीजों का उपचार करने वाले चेन्नई के चिकित्सक रवि कन्नन‚ तमिलनाड़ु में चार दशक से अधिक समय से 14,000 से अधिक दिव्यांग लोगों के पुनर्वास में मदद करने वाले दिव्यांग सामाजिक कार्यकर्ता एस रामाकृष्णन को भी यह पुरस्कार (Padma Shri) दिया गया।

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