अमेरिका की रिपोर्ट में माना, नक्सली दुनिया के सबसे खतरनाक संगठनों में एक

अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट की एक रिपोर्ट में सीपीआई-एम (Communist Party of India Maoist) को दुनिया का छठवां सबसे खतरनाक संगठन माना गया है।

Naxals

CPI-M को छठवें नंबर पर रखते हुए कहा गया कि ये संगठन काफी खूंखार है और देश में अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार है।

अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट की एक रिपोर्ट में सीपीआई-एम (Communist Party of India Maoist) को दुनिया का छठवां सबसे खतरनाक संगठन माना गया है। CPI (Maoist) वही संगठन है जिसने देश में वामपंथी आंदोलन की शुरुआत की। तब ऐसा क्या है जो एक पार्टी को अमेरिका ने आतंक फैलाने वाले संगठन की श्रेणी में रख दिया।

CPI
नक्सली दुनिया के सबसे खतरनाक संगठनों में एक

स्टेट डिपार्टमेंट ने 8 नवंबर को आतंकवाद से प्रभावित देशों और आतंकवादी संगठनों की सूची जारी की। इसमें आतंकवाद प्रभावित देशों में भारत का स्थान चौथा है। इससे पहले अफगानिस्तान (Afghanistan), सीरिया (Syria) और इराक (Iraq) हैं। रिपोर्ट में अमेरिका ने बताया है कि देश में कानून लागू करने वाली संस्थाओं के कमजोर होने की वजह से इसकी ये हालत है। वहीं CPI-M को छठवें नंबर पर रखते हुए कहा गया कि CPI संगठन काफी खूंखार है और देश में अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार है। ‘कंट्री रिपोर्ट ऑन टेररिज्म 2018’ के मुताबिक 2018 में भारत में हुई कुल आतंकी घटनाओं में 26 फीसदी के पीछे CPI (माओवादी) का हाथ था।

दूसरे नंबर पर जैश-ए-मोहम्मद (नौ फीसदी) रहा। 37 फीसदी घटनाओं के पीछे किसी संगठन को जिम्मेदार नहीं बताया गया है। अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में भारत के सभी 29 राज्‍य आतंकवाद से प्रभावित रहे। पिछले साल पूरे देश में हुई 671 आतंकी वारदातों में 971 लोगों की मौत हुई। जम्‍मू-कश्‍मीर के बाद सबसे खराब हालात छत्‍तीसगढ़ के रहे। राज्‍य में 111 आतंकी वारदातें हुईं। वहीं, मणिपुर में 22 हमले हुए। अकेले जम्‍मू-कश्‍मीर में 386 आतंकी हमले हुए। वैसे CPI माओवादी को भारत सरकार भी आतंकी संगठन मानती है। भारत में माओवादी विचारधारा के लोग आदिवासियों के साथ जुड़े हैं, जो अपने जंगल और जमीनों के औद्योगिकीकरण से परेशान हैं और सरकार से नाराज हैं। ऐसे में नक्सली उन्हें सरकार के खिलाफ एकजुट करते हैं।

वे उन्हें तैयार करते हैं कि वे अपने इलाकों में किसी सरकारी अफसर या किसी नीति को न आने दें, चाहें इसके लिए हिंसा का रास्ता ही क्यों न अपनाना पड़े। देश में अक्सर छत्तीसगढ़, बंगाल, आंध्रप्रदेश और उड़ीसा जैसे राज्यों में सरकारी लोग नक्सल आतंक का शिकार होते आए हैं। साल 1980 से अब तक 20,000 से भी ज्यादा मासूम लोग नक्सल आतंक का शिकार हुए हैं। कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान साल 2009 में पीएम मनमोहन सिंह ने नक्सल गतिविधियों को सबसे बड़ा “internal security threat” कहा था। इसी दौरान ऑपरेशन ग्रीन हंट चला, जिसकी वजह से बहुत से आदिवासियों जो तब नक्सली बन चुके थे, उन्होंने सरेंडर किया। वैसे तो अमेरिकी रिपोर्ट में सीपीआई (माओवादी) से पहले अफगानिस्‍तान के तालिबान (Taliban), अफ्रीका के अल-शबाब (Al-Shabaab), बोकोहराम (Boko Haram) और फिलीपींस की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के बाद सबसे खतरनाक संगठन बताया गया है।

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