Bihar: पूर्वी चंपारण से हार्डकोर नक्सली गिरफ्तार, पत्नी रह चुकी है जिला पार्षद सदस्य

बिहार (Bihar) के पूर्वी चंपारण जिले की पुलिस ने पताही थाने के परसौनीकपूर गांव में 28 सितंबर की देर रात छापेमारी कर हार्डकोर नक्सली वीरेंद्र पासवान को गिरफ्तार कर लिया। छापेमारी का नेतृत्व अभियान एसपी एचएस गौरव ने किया।

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गिरफ्तार नक्सली वीरेंद्र

एसपी के अनुसार, वीरेंद्र ने अपने साथियों के साथ मिलकर 26 अप्रैल, 2014 को Bihar के हरपुरनाग रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर सवारी गाड़ी को उड़ाने के लिए बम लगाया था। इससे हुए विस्फोट में मालगाड़ी के चार डिब्बे क्षतिग्रस्त हो गये थे। इस मामले को लेकर चकिया थाने में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस को इस मामले में उसकी तलाश थी। इसके अलावा चामू टोला में कंस्ट्रक्शन कंपनी के बेस कैंप में लेवी के लिए आग लगा दिए जाने सहित कई मामले में भी वीरेंद्र वांछित रहा है।

वह कई सालों से फरार चल रहा था। इसी बीच Bihar पुलिस को सूचना मिली कि वीरेंद्र परसौनीकपूर आया है। सूचना के आधार पर मधुबन एसएसबी और पुलिस बल ने संयुक्त ऑपरेशन में उसके घर पर छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, 2004 में वीरेंद्र ने सौ नक्सलियों के साथ मिलकर परसौनीकपूर गांव के लक्ष्मी सिंह के घर लूटपाट की थी। नक्सलियों ने उनकी दोनाली बंदूक भी लूट ली थी। इस मामले में 9 साल बाद 2014 में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

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वीरेंद्र पासवान की पत्नी अमिता देवी 2011 से 2016 तक जिला पार्षद सदस्य रह चुकी है। थानाध्यक्ष विकास तिवारी के मुताबिक, वीरेंद्र पासवान ने ही साल 2010 में पताही पूर्वी से अपनी पत्नी को जिला परिषद सदस्य बनवाया। जब उसकी पत्नी चुनाव हार गई तो वह फिर नक्सली संगठन के लिए सक्रिय हो गया था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार जुटी हुई थी। इससे पहले, Bihar के सासाराम जिले में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान की गई छापेमारी में दो हार्डकोर नक्‍सलियों को गिरफ्तार किया गया था। छोपमारी नौहट्टा थाना क्षेत्र के सलमा जंगल में हुई।

दोनों नक्सली अजय राजभर के साथ तृतीय प्रस्तुति कमेटी नामक नक्सली संगठन के सक्रिय सदस्य हैं। जानकारी के अनुसार, सीआरपीएफ को नौहट्टा थाना क्षेत्र स्थित कैमूर पहाड़ी पर स्थित सलमा जंगल में नक्‍सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसके बाद जवानों ने जंगल को घेर लिया। छापेमारी में दो हार्डकोर नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया। दोनों नक्सली टीपीसी (तृतीय प्रस्तुति कमेटी) के बताए जाते हैं। इस संबंध में सीआरपीएफ 47 बटालियन के सहायक समादेष्टा सुभाष चंद्र झा के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए दोनों नकसली चार सालों से फरार थे। बंदा गांव में पुलिस के साथ मुठभेड़ समेत दो मामलों में इनपर केस दर्ज है।

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