नायक: राष्ट्रीय चेतना का सृजन करने वाले क्रांतिकारी कवि की कहानी, संजीव श्रीवास्तव की जुबानी

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar) की आज पुण्यतिथि है। दिनकर (Dinkar) का निधन 24 अप्रैल, 1974 को हुआ था। दिनकर उन कवियों में शुमार हैं जिनकी कविताएं आम आदमी से लेकर बड़े-बड़े विद्वान पसंद करते हैं।

Ramdhari singh dinkar

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar) की आज पुण्यतिथि है। दिनकर का निधन 24 अप्रैल, 1974 को हुआ था। दिनकर उन कवियों में शुमार हैं जिनकी कविताएं आम आदमी से लेकर बड़े-बड़े विद्वान पसंद करते हैं। देश की आजादी की लड़ाई से लेकर आजादी मिलने तक के सफर को दिनकर ने अपनी कविताओं द्वारा व्यक्त किया है। उनकी 46वीं पुण्यतिथि पर संजीव श्रीवास्तव सुना रहे हैं उनकी जिंदगी से जुड़े रोचक किस्से।

सुनिए कवि दिनकर की जिंदगी से जुड़े दिलचस्प किस्सेः

देश की हार-जीत और हर कठिन परिस्थिति को दिनकर ने अपनी कविताओं में उतारा है। एक ओर उनकी कविताओ में ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रान्ति की पुकार है तो दूसरी ओर कोमल श्रृंगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति। दिनकर की कविताओं का जादू आज भी उतना ही कायम है।

सदियों की बुझी ठंडी राख सुगबुगा उठी,

मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है,

दो राह, समय के रथ का घर्घर नाद सुनो,

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है,

फावड़े और हल राजदंड बनने को हैं,

धूसरता सोने से श्रृंगार सजाती है,

दो राह, समय के रथ का घर्घर नाद सुनो,

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।

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