दो खूंखार नक्सलियों की कहानी जिन्होंने प्यार के लिए छोड़ा हिंसा का रास्ता

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जंगल की ज़िंदगी हमेशा मुश्किल होती है। अंधेरे में खोई वीरान ज़िंदगी। जंगल में रहते वक्त इस बात का एहसास ही नहीं होता कि उजाला नाम की कोई चीज भी है, लेकिन कहते हैं ना जहां चाह है वहां राह है। ऐसी ही राह मिली ओडिशा के मल्कानगिरी के रहने वाले दो नक्सलियों को। सालों तक जगंल में आतंक का खेल खेलते-खेलते जाने कब जिंदगी ने इनके दिल में दस्तक दी, इन्हें पता ही नहीं चला। ज़िंदगी आई तो मोहब्बत पनपी और फिर ये एहसास ज़ोर मारने लगा कि मोहब्बत की बस्ती में अंधेरे की भला क्या हस्ती।

लिहाजा, हथियार छोड़ कर इन दोनों पूर्व नक्सलियों ने जिंदगी का दामन थाम लिया। इसके लिए बाकायदा उन्होंने पुलिस के सामने सरेंडर किया। फिर भला पुलिस महकमा इस नेक काम में कैसे पीछे रहता। तो ओडिशा के पुलिस महकमे ने रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम के तहत इनकी शादी करवाने का जिम्मा उठा लिया। आखिर, पुलिस वाले भी तो यही चाहते हैं कि लोग शांति और प्यार से रहें। किसे अच्छा लगता है खून-खराबा, दहशत और अशांति।

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अब शादी पुलिस महकमे की मदद से हुई तो जाहिर है बड़ी संख्या में पुलिस वाले भी समारोह में शरीक हुए। एक से बढ़कर एक पुलिस के तमाम आला अधिकारी भी शादी में पहुंचे। इन्होंने ना सिर्फ इस पूर्व नक्सली जोड़े को आशीर्वाद दिए बल्कि ढेरों गिफ्ट भी दिए ताकि वे अपनी आइंदा जिंदगी को सुखद बना सकें।

अब इनकी जिंदगी में खुशियां ही खुशियां हैं। ना जंगल की भागमभाग है ना पुलिस का खौफ।

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