1991 से अब तक: भारत के बजट का इतिहास, ऐसे आया परिवर्तन

बजट भाषणों में 1991 का मनमोहन सिंह का भाषण सबसे लंबा करीब 18,364 शब्दों का था। ग्लोबलाइजेशन के बाद के बर्षों में यशवंत सिन्हा का बजट भाषण सबसे लंबा रहा, जो लगभग 14,895 शब्दों का था। इन सब की तुलना में पी चिदंबरम ने छोटे बजट भाषण दिए, जो करीब 12,830 शब्दों का था।

यूनियन बजट, बजट 2019, टैक्स स्लैब, आम बजट, आम बजट 2019, केंद्रीय बजट, निर्मला सीतारमण, बजट, रेल बजट, केंद्रीय बजट 2019, रेलवे बजट, लाइव बजट, यूनियन बजट 2019, बजट 2019 समाचार, बजट 2019 लाइव कवरेज, बजट लाइव, वित्त मंत्री, बहीखाता, बही, खाता

अब तक के बजट की कहानी

साल 1991 से 2019 तक 6 वित्तमंत्रियों ने बजट पेश किया है। 1991 में तत्कालीन वित्तमंत्री मनमोहन सिंह ने बजट पेश किया था। उसके बाद यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह, पी चिदंबरम, प्रणब मुखर्जी और अरूण जेटली बतौर वित्त-मंत्री बजट पेश कर चुके हैं। मनमोहन के बजट भाषण में सबसे अधिक बाजार और निवेश बढ़ाने की बात थी तो अरूण जेटली, पी चिदंबरम, प्रणब मुखर्जी के बजट भाषणों में किसानों को ध्यान में रखा गया था। इन बजट भाषणों में 1991 का मनमोहन सिंह का भाषण सबसे लंबा करीब 18,364 शब्दों का था। केवल अरूण जेटली ही अपने 2014-15 के बजट भाषण में इस रिकॉर्ड के करीब पहुंच सके। उनका बजट भाषण 16,552 शब्दों का था।

ग्लोबलाइजेशन के बाद के बर्षों में यशवंत सिन्हा का बजट भाषण सबसे लंबा रहा, जो लगभग 14,895 शब्दों का था। इन सब की तुलना में पी चिदंबरम ने छोटे बजट भाषण दिए, जो करीब 12,830 शब्दों का था। रिकॉर्ड 10 बार बजट भाषण देने वाले वित्तमंत्री मोरारजी देसाई के बाद दूसरे नंबर पर पी चिदंबरम आते हैं। उन्होंने आठ बार बजट भाषण दिया था। मनमोहन सिंह ने साल 1991 से 1996 तक 5 बार बजट भाषण दिए। उन्होंने मुद्रास्फीति के बारे में सबसे अधिक बात की और वह इस पर काबू पाने में कामयाब भी रहे। यशवंत सिन्हा ने भी साल से 1998 से 2003 तक 5 बार बजट भाषण दिए। उन्होंने घाटा, गरीबी और रोजगार को अपने बजट भाषण में अधिक प्राथमिकता दी थी।

जसवंत सिंह ने बतौर वित्त-मंत्री साल 2003-2004 का बजट भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने उन्होंने गरीबी, रोजगार और बाहरी क्षेत्र को ध्यान में रखा था। पी चिदंबरम ने साल 1996-1998, 2004-2009, 2013-2014 तक 8 बार बजट भाषण दिए। जिसमें उन्होंने ह्यूमन कैपिटल शब्ट का सबसे अधिक उल्लेख किया। वहीं, प्रणब मुखर्जी ने 4 साल 2009 से 2013 तक 4 बार बजट भाषण दिया। किसी भी अन्य वित्त मंत्री की तुलना में मुखर्जी ने इसमें पर्यावरण और संबंधित शर्तों का अधिक उल्लेख किया। उन्होंने मुद्रास्फीति के बारे में भी बात की।

वित्त-मंत्री के तौर पर अरुण जेटली ने साल 2014 से 2019 तक 5 बार बजट दिया। अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में सर्वाधिक जोर किसानों, गरीबों, रोजगार और राज्यों पर दिया। शहरी और मध्यम वर्ग का भी प्रमुखता से उल्लेख किया था। अब निगाहें 5 जुलाई को होने वाले वर्तमान वित्त-मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण पर हैं।

पढ़ें: निर्मला सीतारमण के पहले बजट की बड़ी बातें

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App