जान पर खेल कर जवान ने यूं बचाई 4 की जान, परिवार चाहता है मिले सम्मान

ट्रेन सामने थी, जान दांव पर था फिर भी अपनी जान देकर बचा ली चार लोगों की जिंदगी। परिवार के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

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जगबीर सिंह राणा 4 लोगों की जान बचाते हुए शहीद हो गए थे।

तारीख थी 21 अप्रैल। जगह था दिल्ली के आजादपुर रेलवे स्टेशन का सिग्नल नंबर 7। रात के करीब 9 बजे थे। दोनों ही तरफ से सिग्नल ग्रीन था। दिल्ली से अंबाला जाने वाली एक ट्रेन वहां से गुजर रही थी। ठीक उसी वक्त दूसरी ट्रेन कालका से नई दिल्ली की तरफ आ रही थी। तभी सिग्नल नंबर पर तैनात कॉन्सटेबल की नजर उन तीन बच्चों और महिला पर पड़ी जो पटरियों पर चल रहे थे। उसे समझ आ गया कि उन लोगों को अंबाला जा रही ट्रेन तो दिख रही है लेकिन शायद कालका शताब्दी उन्हें नहीं दिख रही। इसके बाद वह कॉन्सटेबल चिल्लाते हुए उनकी तरफ दौड़ा। पर ट्रेन की आवाज में उसकी आवाज कहीं दब गई। बिजली सी फुर्ती के साथ उस कॉन्सटेबल ने वहां पहुंच कर उन लोगों को ट्रैक से दूसरी तरफ धक्का दे दिया। उन चार लोगों की जान तो बच गई, पर वो खुद ट्रेन के नीचे आ गया। उस कॉन्सटेबल का नाम है जगबीर सिंह राणा। 50 साल के राणा आरपीएफ में कॉन्सटेबल के पद पर तैनात थे।

शहीद जगबीर सिंह राणा के साथ काम करने वाले उन्हें एक नेकदिल इंसान बताते हैं, जो हमेशा दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहते थे। अपनी इसी तत्परता के बूते उन्होंने अपनी ड्यूटी के दौरान कई पुरस्कार भी जीते थे। उनकी इस बहादुरी के लिए उनके महकमे ने उनके लिए वीरता सम्मान की सिफारिश भी की है।

हरियाणा के रहने वाले राणा के परिवार में माता-पिता के अलावा पत्नी, दो बेटे और दो बेटियां हैं। पूरा परिवार उनके जाने से सदमे में है। राणा की पत्नी बताती हैं कि रोज की ही तरह उस दिन भी वह शाम करीब 5 बजे ड्यूटी के लिए घर से निकले थे। रात में करीब पौने दस बजे उन्हें फोन पर सूचना मिली कि उनके पति अब नहीं रहे। घरवालों के मुताबिक, अक्सर वो अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की जान बचाने के लिए रेलवे ट्रैक पर चले जाया करते थे।

अब जबकि परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य नहीं रहा तो परिवार चलाने की जिम्मेदारी राणा के बड़े बेटे रोहित के कंधों पर आ गई है। रोहित अभी 21 साल के हैं। आलम ये है कि इतने बड़े परिवार की आजीविका चलाने के लिए ना तो पैसे हैं और ना ही इतनी जमीन है कि उस पर खेती-बाड़ी करके परिवार का गुजारा किया जा सके।

राणा का परिवार चाहता है कि उनकी जगह बड़े बेटे को आरपीएफ में नौकरी मिल जाए ताकि परिवार का गुजारा हो सके। साथ ही, उन्हें इस बात का भी इंतजार है जगबीर राणा को उनकी वीरता के लिए सम्मानित किया जाए। चूंकि राणा हरियाणा के रहने वाले थे और दिल्ली में सेवारत थे, ऐसे में परिवार की उम्मीदें हरियाणा और दिल्ली दोनों ही सरकारों से हैं।

फिलहाल, राणा के परिवार की मदद के लिए उत्तर रेलवे सामने आया है। जिसकी तरफ से परिवार को 2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी गई है। वहीं, अखिल भारतीय आरपीएफ ने भी करीब 19 लाख रुपए की आर्थिक मदद पहुंचाई है।

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