देश की पहली महिला DIG का निधन, 13 डकैतों को पकड़ हुई थीं मशहूर

जिस पुलिस जुल्म के चलते वह आईपीएस बनी, उसी पुलिस की छवि को सुधारने के लिए सारी जिंदगी काम किया।

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भारत की पहली महिला डायरेक्‍टर जनरल ऑफ पुलिस  कंचन चौधरी भट्टाचार्य का 26 अगस्त की रात निधन हो गया।

भारत की पहली महिला डायरेक्‍टर जनरल ऑफ पुलिस  कंचन चौधरी भट्टाचार्य का 26 अगस्त की रात निधन हो गया। उन्‍होंने मुंबई में अंतिम सांस ली। भट्टाचार्य 1973 बैच की आईपीएस अधिकारी थीं।  जब उन्हें वर्ष 2004 में उत्तराखंड का डीजीपी नियुक्त किया गया, तब उन्होंने एक तारीख लिखी थी। आइए जानते हैं इस असाधारण महिला पुलिस ऑफिसर की जिंदगी की कहानी-

कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जो जिंदगी बदल देती हैं। 3 फरवरी, 1967 के दिन अमृतसर के मदन मोहन चौधरी पर हुए पुलिस के जुल्म को देख उनकी दो बेटियों ने प्रण लिया कि वे पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार लाकर ही रहेंगी। इसी प्रण का बीड़ा उठाकर बड़ी बेटी कंचन चौधरी भट्टाचार्य आईपीएस बनीं। जबकि मदन मोहन की छोटी बेटी कविता चौधरी ने पिता पर हुए जुल्म को ′उड़ान′ सीरियल के माध्यम से पूरे देश को दिखाया। कंचन अमृतसर की ही किरण बेदी के बाद देश की दूसरी महिला आईपीएस अधिकारी भी हैं। किरन रिश्ते में कंचन की बहन हैं।

कंचन और कविता दोनों अमृतसर स्कूल सेक्रेड-हार्ट से पढ़ी हैं। इसके बाद कंचन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के आईपी कॉलेज से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। 1973 में पहली बार आईपीएस की परीक्षा दी और देश की दूसरी महिला आईपीएस बनीं। वह उत्तरप्रदेश में पहली महिला आईपीएस, पहली महिला डीआईजी और पहली महिला आईजी थीं। अंडर ट्रेनिंग एएसपी कंचन लखनऊ व मलिहाबाद में कार्यरत रहीं।

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कंचन चौधरी भट्टाचार्य

यहां एक साल में उन्होंने कुल 13 खूंखार डकैतों को पकड़कर आत्मसमर्पण करवाया। उस वर्ष देश में कुल 19 डकैत पुलिस ने पकड़े थे, जिनमें से 13 डकैतों को अकेले कंचन ने पकड़े थे। अपने 33 साल के करियर में उन्होंने बैडमिंटन खिलाड़ी सईद मोदी और रिलायंस-बांबे डाइंग जैसे कई संवेदनशील केस हैंडल किए। 1975 से 1978 तक कंचन चौधरी भट्टाचार्य लखनऊ की एसपी व एसएसपी भी रहीं। बरेली में डीआईजी रही और सीबीआई में बड़े पदों पर काम किया।

15 जून, 2004 को कंचन ने उत्तराखंड की पहली महिला डीजीपी बन एक नया इतिहास लिखा। 26 जून, 2004 को बतौर डीजीपी पहली समीक्षा बैठक में दो टूक कहा ‘सुधर जाओ या घर जाओ’ तो रातों-रात वहां की पुलिस का रवैया पब्लिक के लिए दोस्ताना बन गया। जिस पुलिस जुल्म के चलते वह आईपीएस बनी, उसी पुलिस की छवि को सुधारने के लिए सारी जिंदगी काम किया। 2007 में सेवानिवृत्ति होने के बाद भी वह देश के लिए निस्वार्थ अपनी सेवाएं अलग-अलग रूप में देती रहीं। वह कविताएं भी लिखती थीं।

वहीं, 1989 से 1991 तक दिल्ली दूरदर्शन पर ′उड़ान′ सीरियल में उनकी बहन कविता चौधरी ने खुद कल्याणी की ऐसी दमदार भूमिका निभाई कि पूरा देश उन्हें कल्याणी सिंह के नाम से जानने लगा। कविता ने इस सीरियल को खुद लिखा और डायरेक्ट किया था। शेखर कपूर के साथ उड़ान के बाद उन्होंने कई सीरियल बनाए जिनमें ‘योर ऑनर’ भी काफी चर्चित रहा। कविता कहती हैं कि अगर उनके पिता के साथ पुलिस ज्यादती न करती तो शायद दीदी (कंचन चौधरी) आईपीएस और मैं ‘उड़ान’ न भरती।

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