अलगाववाद के खिलाफ सरकार का एक और बड़ा कदम

Separatists

केंद्र सरकार ने अलगाव‍ादी (Separatists) नेता यासीन मलिक के संगठन जम्‍मू कश्‍मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) पर प्रतिबंध लगा दिया है। अलगाववाद के खिलाफ यह एक बड़ा कदम है। कैबिनेट की सुरक्षा समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया। केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा ने कहा कि राज्य में अलगाववादी गतिविधियों और कई अन्य हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने के कारण यासीन मलिक के जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट पर बैन लगाया गया।

मलिक पर आरोप है कि वह भारत विरोधी गति‍विधियां चलाता था। वह पाकिस्‍तान जाता था और वहां देश विरोधी गतिविधि‍यों में शामिल होता था। बैन लगाने के बाद एक प्रेस-कॉन्‍फ्रेंस में गृह सचिव ने कहा कि जेकेएलएफ देश की सुरक्षा के लिए खतरा है।  उन्होंने बताया कि इस संगठन को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत प्रतिबंधित किया गया है।

उसकी हिंसक गतिविधियों के बारे में बात करते हुए गृह सचिव ने कहा कि जेकेएलएफ ने कश्मीर घाटी में अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा दिया है। 1988 से ही घाटी में हुई कई हिंसाओं में इस संगठन का हाथ रहा है। गृह सचिव के अनुसार कश्‍मीरी पंडितों को घाटी से भगाने का मास्‍टर माइंड यासीन मलिक ही है। उसका संगठन कश्‍मीर में पत्‍थरबाजों को पैसे देता है। वह इसके लिए बड़े पैमाने पर फंडिंग करता है।

उन्होंने कहा कि जेकेएलएफ के खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज हैं। यह संगठन तत्कालीन वी पी सिंह सरकार में गृह मंत्री रहे मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद के अपहरण और वायुसेना के चार कर्मचारियों की हत्या में शामिल था। यासीन मलिक अभी जम्मू की कोट बलवाल जेल में बंद है।

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इससे पहले सरकार ने जमात-ए-इस्लामी पर 5 साल के लिए प्रतिबंध लगाया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया था कि जमात-ए-इस्लामी, जम्मू कश्मीर के आतंकी संगठनों के साथ नजदीकी संबंध रहे हैं। इतना ही नहीं यह संगठन जम्मू-कश्मीर के अतिरिक्त दूसरी जगहों पर भी चरमपंथियों और आतंकियों की मदद करता है।

गृह मंत्रालय की कार्रवाई में जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हामिद फैयाज सहित 350 से ज्यादा सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था। केंद्र के निर्देश पर अलगाववादी संगठनों और उनके नेताओं पर कार्रवाई करते हुए उनकी संपत्तियां भी जब्त कर ली गईं थीं।

1970 में बर्मिंघम में पाकिस्तानी नागरिक अमानुल्लाह खान ने जम्‍मू कश्‍मीर लिबरेशन फ्रंट का गठन किया था। 1971 में यह संगठन उस वक्त सुर्खियों में आया जब उसके सदस्यों ने श्रीनगर से जम्मू जा रहे इंडियन एयरलाइंस के एक विमान को अगवा कर लिया था।

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