नोएडा: छापेमारी में घर से मिलीं माओवाद पर किताबें, डीयू के प्रोफेसर ने कहा- इससे मैं माओवादी साबित नहीं होता

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दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हनी बाबू

देश की अंदरुनी शांति के लिए खतरा बन चुके नक्सलियों पर नकेल कसने की कवायद जारी है। प्रशासन की कोशिश है कि वैसे लोगों पर भी निगरानी रखी जाए जो समाज की मुख्यधारा में रहकर किसी ना किसी तरह ‘लाल आतंक’ की गलत नीतियों का समर्थन करते हैं। पिछले कुछ सालों में जांच कर्ताओं की टीम ने देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले ऐसे लोगों पर कार्रवाई भी की है। अब उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित एक मकान में नोएडा और पुणे की पुलिस ने संयुक्त रुप से छापेमारी की है। यह छापेमारी बीते मंगलवार (10-09-2019) की सुबह करीब 6.30 बजे की गई।सेक्टर-78 के सी ब्लॉक की इस फिल्डिंग के 21वें फ्लोर पर बने एक फ्लैट में दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हनी बाबू रहते हैं। सुबह-सुबह हुई छापेमारी से आसपास के लोग हैरान थे।

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पुलिस की जांच करीब 6 घंटे तक चली। डीयू के नॉर्थ कैंपस में अंग्रेजी के प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत 45 साल के हनी बाबू करीब 10 सालों से शिक्षण कार्यों से जुड़े हैं। प्रोफेसर के यहां छापेमारी के दौरान पुलिस की टीम को यहां रखी कुछ किताबें और इलेक्ट्रॉनिक सामान मिले। यह किताबें माओवाद पर आधारित थीं। लेकिन बाबू ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘पुणे पुलिस को मेरी किताबों में सबसे ज्यादा दिलचस्पी थी। मेरे पास यदि आतंकवाद पर किताबें हैं तो मैं आतंकी नहीं हो जाता। इसी तरह माओवाद पर किसी किताब को रखने से क्या मैं आतंकी हो जाता हूं?’ बताया जा रहा है कि पुणे में एलगार परिषद में दिए गए भड़काऊ भाषण के सिलसिले में पुलिस ने यह छापेमारी की है।

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इस मामले में अब तक कई जाने-माने लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बता दें कि एलगार परिषद रैली का आयोजन साल 2017 में 31 दिसंबर को किया गया था। पुणे के भीमा-कोरेगांव में आयोजित इस रैली के दौरान जबरदस्त हिंसा भी हुई थी। पुलिस के मुताबिक इस रैली के तार नक्सलियों से जुड़े थे। जिसके बाद इस मामले की जांच चल रही है और कई जगहों पर पुलिस अब तक छापेमारी कर चुकी है। बहरहाल डीयू के प्रोफेसर के घर छापेमारी के बाद उनके घर से मिले इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की फॉरेंसिक जांच के बाद ही इस विषय पर जाचं टीम अपनी इस जांच को लेकर आगे फैसले लेगी।

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