अब ‘लादेन किलर’ करेगा सरहद की हिफाजत, भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा

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भारतीय वायुसेना को पहला लड़ाकू हेलीकॉप्टर अपाचे गार्जियन (Apache Helicopter) मिल गया है। इसे ‘लादेन किलर’ के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण अमेरिका के एरिजोना में हुआ है। भारत ने अमेरिका के साथ 2015 में 22 अपाचे हेलीकॉप्टर के लिए समझौता किया था। एरिजोना में एक कार्यक्रम में बोइंग ने वायुसेना के एयर मार्शल ए एस बुटोला को यह हेलीकॉप्टर सौंपा। हेलीकॉप्टर का पहला बैच इसी साल जुलाई में आ जाएगा। फ़िलहाल इस हेलीकॉप्टर के ट्रेनिंग के लिये चुने गए एयर और ग्राउंड क्रू की ट्रेनिंग अमेरिकी सेना के अल्बामा एयर बेस पर हो रही है। बोइंग एएच-64 ई अपाचे को दुनिया का सबसे घातक हेलीकॉप्टर माना जाता है।

इस हेलीकॉप्टर के भारतीय वायुसेना में शामिल होने से इसकी शक्ति बढ़ेगी और यह आधुनिक तकनीकि से लैस होगी। इस हेलीकॉप्टर की सबसे खास बात ये है कि पहाड़ी इलाकों में कार्य करने में सक्षम है। इसे भारतीय वायुसेना की जरूरतों के हिसाब से बनाया गया है। अपाचे हेलीकॉप्टर से सटीक हमले किए जा सकते हैं। यह दुश्मन के इलाके में भी घुसकर मार कर सकता है। साथ ही, इसकी मदद से ग्राउंड पर क्या हो रहा है इसकी फोटोग्राफी भी की जा सकती है। इसके आने से वायुसेना के साथ थल सेना के ऑपरेशनल ताकत कई गुनी बढ़ जाएगी। अपाचे की खासियत है कि यह अमेरिकी सेना और अन्य अतंरराष्ट्रीय रक्षा सेनाओं का सबसे एडवांस हेलीकॉप्टर है।

यह एक साथ कई काम करने में सक्षम है। अपाचे हेलीकॉप्टर को अमेरिका ने पनामा से लेकर अफगानिस्तान और इराक तक के दुश्मनों से लोहा लेने में प्रयोग किया है। लेबनान और गाजा पट्टी में अपने सैन्य ऑपरेशनों के लिए इजरायल इसी का प्रयोग करता आया है। अमेरिकी सेना के एडवांस अटैक हेलीकॉप्टर प्रोग्राम के लिए इस हेलीकॉप्टर को बनाया गया था। साल 1975 में इसने पहली उड़ान भरी थी। इसे साल 1986 में अमेरिकी सेना में शामिल किया गया था। इस हेलीकॉप्टर में दो जनरल इलेक्ट्रिक टी700 टर्बोशैफ्ट इंजन लगे हैं। इसमें आगे की तरफ सेंसर फिट है जिसकी वजह से यह रात के अंधेरे में भी उड़ान भर सकता है।

अपाचे 365 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरता है। तेज गति के कारण यह दुश्मनों के टैंकरों के आसानी से परखच्चे उड़ा सकता है। इस हेलीकॉप्टर में हेलिफायर और स्ट्रिंगर मिसाइलें लगी हैं। जिनके पेलोड इतने तीव्र विस्फोटकों से भरे होते हैं कि दुश्मन का बच निकलना नामुमकिन हो जाता है। इसके अलावा इसके दोनों तरफ 30एमएम की दो गन लगी हैं। इसका वजन 5,165 किलोग्राम है। साथ ही, इसके अंदर दो पायलटों के बैठने की जगह होती है। इसे इस तरीके से डिजायन किया गया है कि यह युद्ध क्षेत्र में किसी भी परिस्थिति में टिका रह सकता है। इसमें हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले, इंटिग्रेटेड हेलमेट और डिस्प्ले साइटिंग सिस्टम लगा है।

जिसकी मदद से पायलट हेलीकॉप्टर में लगी ऑटोमैटिक एम-230 चेन गन से अपने दुश्मन को आसानी से टारगेट कर सकता है। अपाचे हर तरह की परिस्थिति और मौसम में अपने दुश्मन के लिए काल है। अमेरिका के अलावा इसे इजरायल, मिस्त्र और नीदरलैंड की सेनाएं भी इस्तेमाल करती हैं। उल्लेखनीय है कि इसी साल फरवरी में अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोईंग ने भारतीय वायुसेना के लिए चार चिनूक हैवीलिफ्ट सैन्य हेलीकॉप्टर्स की आपूर्ति की थी। चिनूक बहुद्देशीय, वर्टिकल लिफ्ट प्लेटफॉर्म हेलीकॉप्टर है जिसका इस्तेमाल सैनिकों, हथियारों, उपकरण और ईंधन को ढोने में किया जाता है। इसका इस्तेमाल मानवीय और आपदा राहत अभियानों में भी किया जाता है। राहत सामग्री पहुंचाने और बड़ी संख्या में लोगों को बचाने में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।

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