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Kargil War: खून का आखिरी कतरा भी किया देश पर न्‍यौछावर, पढ़ें कैप्टन नीकेजाकुओ कैंगुरूसे की शौर्यगाथा

Captain Neikezhakuo Kengurüse

Kargil War: दुश्मन ऊंचाई पर थे तो उन्होंने भारतीय जवानों को आता देख लिया। फिर देखते ही देखते ही ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। इसी दौरान एक गोली कैप्टन नीकेजाकुओ कैंगुरूसे (Captain Neikezhakuo Kengurüse) को भी लगी।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में कारगिल का युद्ध (Kargil War) लड़ा गया था। युद्ध में पाकिस्तान को भारत ने बुरी तरह से मात दी थी। भारतीय सेना (Indian Army) ने ऐसा पराक्रम दिखाया था, जिसे देखने के बाद दुश्मन देश आज भी थर-थर कांप उठता होगा। सेना के जवानों ने खून का आखिरी कतरा भी देश पर न्‍यौछावर कर दिया था।

कैप्टन नीकेजाकुओ कैंगुरूसे (Captain Neikezhakuo Kengurüse) भी इन्हीं जवानों में से एक थे। नगालैंड के कोहिमा जिले के नरहेमा में 15 जुलाई, 1974 को जन्में कैंगुरूसे ने युद्ध में ऐसा पराक्रम दिखाया था, जिसे याद कर दुश्मन कांप उठा था। 2 राजपूताना राइफल के इस जवान की वीरता के लिए इन्हें मरणोपरांत ‘महावीर चक्र’  से सम्मानित किया गया। वे 28 जून, 1999 को शहीद हो गए थे।

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बात करें युद्ध में इनके शौर्यगाथा कि तो अपनी बटालियन के घातक प्लाटून का नेतृत्व की जिम्मेदारी मिलने के बाद 28 जून की रात कैप्टन कैंगुरूसे के प्लाटून को ब्लैक रॉक नामक टीले से दुश्मन को खदेड़ने की जिम्मेदारी मिली थी। वे और उनकी टुकड़ी चढ़ाई करते हुए दुश्मन के गोलियों का शिकार हो गई थी।

दुश्मन ऊंचाई पर थे तो उन्होंने भारतीय जवानों को आता देख लिया। फिर देखते ही देखते ही ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। इसी दौरान एक गोली उनको भी लगी। गोली लगने के बावजूद नीकेजाकुओ कैंगुरूसे (Captain Neikezhakuo Kengurüse) ने हिम्मत नहीं हारी। वे ऊपर पहुंचे तो एक चट्टान की आड़ ले ली।

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उन्होंने इस दौरान कई पाक जवानों को मौत के घाट उतार दिया। उन्होंने इस आरपीजी रॉकेट लांचर से सात पाकिस्तानी बंकरों पर हमला किया। दो पाक जवानों को चाकू से तो दो को अपनी रायफल से मौके पर ही ढेर कर दिया। हालांकि, इसी दौरान वे दुश्मन की गोलियों का शिकार हो गए और शहीद हो गए।