5 सालों में टूटी नक्सलवाद की कमर, नक्सली वारदातों में 43 फीसदी की कमी

2014 में नई सरकार बनने के बाद नक्सलवाद से निपटने के लिए नीतियों में व्यापक बदलाव हुआ। असर ये हुआ कि इन 5 सालों में नक्सलवाद की कमर टूट गई।

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मई 2014 से अप्रैल 2019 के दरम्यान नक्सल वारदातों में उल्लेखनीय कमी आई है।

2014 में नई सरकार बनने के बाद नक्सलवाद से निपटने के लिए नीतियों में व्यापक बदलाव हुआ। असर ये हुआ कि इन 5 सालों में नक्सलवाद की कमर टूट गई। आंकड़ों के मुताबिक मई 2009 से अप्रैल 2014 के बीच कुल 8438 नक्सली वारदातें पेश आईं। अगले पांच सालों की बात करें तो मई 2014 से अप्रैल 2019 के दरम्यान देशभर में कुल 4778 नक्सली वारदातें हुईं। मतलब, पिछले 5 सालों में नक्सली वारदातों में कुल 43.4 फीसदी की कमी आई है।

नक्सली हमलों और लैंडमाइन्स विस्फोट में मरने वाले सुरक्षाबल के जवानों और आम नागरिकों की संख्या में 61 फीसदी से अधिक की कमी दर्ज की गई है। मई 2009 से अप्रैल 2014 के बीच ये संख्या 3209 थी, जो अगले 5 साल में घट कर 1247 हो गई। अगर इसमें आम नागरिकों, पुलिस के मुखबिरों और सुरक्षाबल के जवानों की संख्या को अलग-अलग करके देखें, तो मरने वाले आम नागरिकों की संख्या में 59.5 फीसदी, मरने वाले मुखबिरों की संख्या में 46.3 फीसदी, तो वहीं शहीद होने वाले जवानों की संख्या में 65.2 फीसदी की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। अलबत्ता इन वारदातों में घायल होने वाले जवानों की संख्या में 15.7 फीसदी का इजाफा हुआ है।

देखिए खास रिपोर्टः