Manna Dey Birthday Special: पिता चाहते थे वकील बनाना, उस्ताद बादल खान ने पहचानी प्रतिभा

मन्ना डे (Manna Dey) 40 के दशक में अपने चाचा के साथ संगीत के क्षेत्र में अपने सपनों को साकार करने के लिए मुंबई आ गये। वर्ष 1943 में फिल्म ‘तमन्ना’ में बतौर पार्श्वगायक उन्हें सुरैया के साथ गाने का मौका मिला।

Manna Dey

मन्ना डे (फाइल फोटो)

सिनेमा जगत में मन्ना डे (Manna Dey) को एक ऐसे पार्श्वगायक के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने अपने लाजवाब पार्श्वगायन के जरिये शास्त्रीय संगीत को विशिष्ट पहचान दिलाई। मन्ना डे के पिता उन्हें वकील बनाना चाहते थे लेकिन उनका रूझान संगीत की ओर था और वह इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते थे। मन्ना डे के बचपन के दिनों का एक दिलचस्प वाक्या है।

उस्ताद बादल खान और मन्ना डे  के चाचा एक बार साथ-साथ रियाज कर रहे थे। तभी बादल खान ने मन्ना डे की आवाज सुनी और उनके चाचा से पूछा यह कौन गा रहा है। जब मन्ना डे  को बुलाया गया तो उन्होंने अपने उस्ताद से कहा बस ऐसे ही गा लेता हूं लेकिन बादल खान ने मन्ना डे  की छिपी प्रतिभा को पहचान लिया।

पार्श्वगायक मन्ना डे: इनके नगमों ने लोगों के दिलों पर किया राज, शास्त्रीय संगीत को दिया नया आयाम

मन्ना डे 40 के दशक में अपने चाचा के साथ संगीत के क्षेत्र में अपने सपनों को साकार करने के लिए मुंबई आ गये। वर्ष 1943 में फिल्म ‘तमन्ना’ में बतौर पार्श्वगायक उन्हें सुरैया के साथ गाने का मौका मिला। शुरूआती दौर में मन्ना डे (Manna Dey) की प्रतिभा को पहचानने वालों में संगीतकार- शंकर जयकिशन का नाम खास तौर पर उल्लेखनीय है। इस जोड़ी ने मन्ना डे से अलग-अलग शैली में गीत गवाए।

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