इतनी बड़ी अर्थव्यवस्था में प्रवासी मजदूरों के हिस्से रोटी भी नहीं!

एक से दो करोड़ प्रवासी मज़दूरों की बात भी कर लें तो 10 से 20 हज़ार करोड़ रुपए महीने के ख़र्च पर इन्हें सड़कों पर ठोकरें खाने और अपने साथ वायरस को फैलाने से बचाया जा सकता था। 200 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था में क्या एक-दो महीने एक-दो करोड़ बदहाल लोगों का गुज़र चलाने के लिए अर्थव्यवस्था के एक हज़ारवें हिस्से की गुंजाइश भी नहीं थी?

Covid-19

Coronavirus

“टीका बने या न बने, हम तो लौट आए हैं और काम शुरू कर रहे हैं।” यह बात मैं नहीं कह रहा हूं। यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कही और जानते हैं कहां कही? Operation Warp Speed की ख़बर देने के लिए बुलाए संवाददाता सम्मेलन में। क्या है Operation Warp Speed? यह है चरम गति से टीका तैयार करने का अभियान, जिसकी तुलना ट्रंप (Donald Trump) ने दूसरे विश्वयुद्ध (Second World War) में परमाणु बम बनाने के अभियान से की और इसे युद्ध स्तर पर चलाने के लिए उन्होंने इसका नेतृत्व भी सेना के एक जनरल के हाथों में सौंपा। आप सोचेंगे कि टीका क्या कोई बम है जो धमाके किए और बन जाएगा? एक खाली मंप्स यानी गलगंड का टीका है जो चार साल में बन गया था। बाकी सारे टीकों को बनाने में कम से कम दस साल लगे हैं। तो फिर सैकड़ों रूप बदल चुके कोविड-19 (Covid-19) के इस बहरूपिए वायरस का टीका आनन-फानन में कैसे तैयार हो जाएगा? इसके जवाब में ट्रंप साहब (Donald Trump) ने कहा कि हम खाली टीके के भरोसे थोड़े ही हैं? और भी तो बहुतेरी बीमारियां हैं जो आती हैं और टीकों के बिना ही चली जाती हैं! वैसे ही यह भी छूमंतर हो जाएगा! क्या पता? कल हो न हो!

अब आप सोचेंगे कि यही करना था तो दो महीनों में अर्थव्यवस्था का बेड़ा ग़र्क क्यों किया? पहले ही कामकाज खोल कर बैठे रहते, स्वीडन की तरह? आप भी हैं न! समझते नहीं हैं! उस वक़्त चीन में, इटली में, ईरान में और स्पेन में रोज़ सैकड़ों लोग मर रहे थे पर अमेरिका में मरने वालों की गिनती दर्जनों में थी। हवाई यातायात को ट्रंप साहब (Donald Trump) ने बंद कर लिया था। इसलिए सब कंट्रोल में था। राष्ट्रपति की सीईओ शैली के गुणगान हो रहे थे। किसे पता था कि वायरस 15 लाख से भी ज़्यादा लोगों में फैल जाएगा और 90 हज़ार की जान ले लेगा! चलो उस पर कह देते कि हमारा शुक्र मनाइए कि हमने ताबड़तोड़ क़दम उठा कर मरने वालों की संख्या लाख से ऊपर नहीं जाने दी। वर्ना एंटनी फ़ाउची जैसे वैज्ञानिक लोग तो दस-बीस लाख की बातें कर रहे थे। गड़बड़ ये हुई है कि करीब-करीब चार करोड़ लोग बेरोज़गारी भत्ता मांगने आ खड़े हुए हैं। यानी हर चौथा अमेरिकी! ऐसे में चुनाव कैसे जीता जाएगा? टीके का कोई ठिकाना नहीं और नवंबर है कि भागा चला आ रहा है! चुनाव को टालने की बात तो छेड़ी है और जमाईराज कुश्नर ने समर्थन भी कर दिया है, मगर टालना आसान नहीं है!

 

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