war

भारत और पाकिस्तान के बीच आजादी के तुरंत बाद ही युद्ध लड़ा गया था। अगर ये कहें कि भारत पर पहला युद्ध आजादी के एक साल बाद ही थोप दिया गया था, तो ऐसा कहना गलत नहीं होगा।

ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान (Brigadier Mohammad Usman) को बेहद ही बहादुर माना जाता था। कहा जाता है कि उनमें ऐसी काबिलियत थी कि वे थल सेना (Indian Army) के अध्यक्ष बन सकते थे।

ट्रंप ने बताया कि आर्मीनियाई (Armenia) पीएम और अजरबैजान के राष्ट्रपति को बधाई, जो आधी रात को प्रभावी ढंग से संघर्ष विराम का पालन करने के लिए सहमत हुए।

India Pakistan War 1948: आजादी के तुरंत बाद ही पाकिस्तान ने कश्मीर को पाने के लिए 1948 में नापाक साजिश रची जिसे सेना ने बुरी तरह से विफल कर दिया।

सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव एकमात्र ऐसे सैनिक हैं, जिन्हें जिंदा रहते सेना के सर्वोच्च सम्मान 'परमवीर चक्र' से सम्मानित किया गया है।

जवानों के बलिदान को याद रखने और युद्ध में उनकी शौर्य गाथा को बताने के लिए युद्ध स्मारक बनाए जाते हैं। देश में कई जगहों पर युद्ध स्मारक बनाए गए हैं।

दुश्मनों को खदेड़ना भारतीय सेना के लिए बड़ी चुनौती थी। इस युद्ध के दौरान जम्मू-कश्मीर स्थित तिथवाल क्षेत्र में लंबे समय तक एक भीषण लड़ाई लड़ी गई।

हथियार भी उतने एडवांस नहीं थे जितना चीनी सैनिकों के पास थे। हालांकि इस युद्ध में सेना के कई जवानों ने हैंड टू हैंड फाइट कर कई चीनी सैनिकों को ढेर किया था।

चीनी सेना के हमले में गढ़वाल राइफल्स की चौथी बटालियन के ज्यादातर जवान शहीद हो गए थे। जसवंत सिंह अकेले ही 10 हजार फीट ऊंची अपनी पोस्ट डटे हुए थे।

हरि सिंह ने देर से ही सही लेकिन भारत को कश्मीर में मिलाने के लिए हामी भरी तो देखते ही देखते भारतीय सेना कश्मीर पहुंची और दुश्मनों को भगा-भगाकर मारना शुरू किया।

यह भी पढ़ें