Naxals Exposed

'पिता मर गए...यह बात तब पता चली जब मैं दो साल बाद घर आई...मां के मरने की खबर मिली थी लेकिन उस वक्त नक्सली आकाओं ने मुझे जाने नहीं दिया।' मरने के बाद अपने माता-पिता का चेहरा तक नहीं देख सकी कोर्राम सुंदरी उर्फ ललिता की ये बातें नक्सलियों के जुल्म-ओ-सितम की कहानी बयां करने के लिए काफी हैं।

गांव का मुन्ना जब नक्सली बना तो वो इतना बड़ा हो गया कि उसे लोगों की हत्या, लूटपाट और रंगदारी मांगने जैसे काम छोटे लगने लगे। भटका हुआ मुन्ना राम कड़ती (Munna Ram Kadti) कई सालों तक नक्सली संगठन में रहा और संगठन के लिए कई गंभीर अपराधों को अंजाम भी दिया।