Drone Attack

धर्मांतरण को लेकर पूछे गये सवाल के जवाब में राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने कहा कि मतांतरण कराने के किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जायेगा।

खुफिया एजेंसियों ने बताया है कि पाकिस्तानी सेना की मदद से गुलाम कश्मीर में आतंकियों को रॉकेट लॉन्चर और ड्रोन की मदद से हमला करने की ट्रेनिंग दी जा रही है।

यह अनिवार्य है कि सभी सामाजिक व सांस्कृतिक क्षेत्र के जमावड़ों में ड्रोन (Drone) के इस्तेमाल को रोका जाए, जिससे जीवन या संपत्ति के नुकसान के किसी भी संभावित खतरे को खत्म किया जा सके।

ड्रोन हमले (Drone Attack) को एक सस्ता और असान विकल्प (Option) माना जाता है। इसीलिए ड्रोन का इस्तेमाल अब तेजी से बढ़ रहा है।

जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर हुए ड्रोन हमलों (Drone Attack) को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। यह खुलासा जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के डीजीपी दिलबाग सिंह ने 2 जुलाई को किया।

जम्मू (Jammu) में अरनिया सेक्टर के पास एक बार फिर ड्रोन (Drone) देखा गया है। यह इलाका अंतर्राष्ट्रीय सीमा (International Border) के पास मौजूद है।

भारत में हमले के लिए एक खास किस्म का ड्रोन पीओके में तैयार किया जा रहा था। यह ड्रोन तीन किमी तक आईईडी ले जाने में सक्षम था। ड्रोन को नीचे लाने के साथ ब्लास्ट से उड़ाया जा सकता था।

गृह मंत्रालय ने जम्मू में एयरफोर्स स्टेशन पर हुए ड्रोन हमले की जांच राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NIA) को सौंप दी है। इससे पहले एयरपोर्ट अथॉरिटी, लोकल पुलिस और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड भी इस मामले की जांच कर रहे थे।

जम्मू एयरपोर्ट के एयरपोर्ट स्टेशन (Air Force Station) पर हमले के लिए लाइट ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। जिसने हमले के लिए एलओसी के नजदीक मंगला से ड्रोन ने उड़ान भरी थी।

जम्मू में एयरफोर्स स्टेशन (Jammu Air Force Station) में हुए ड्रोन हमलों (Drone Attack) में हालांकि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन बीते कुछ सालों में आतंकियों द्वारा हो रहा ड्रोन्‍स का इस्‍तेमाल चिंता का सबब है।

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