Drone Attack

सुरक्षाबलों को इलाके में आतंकियों (Militants) के छिपे होने की जानकारी मिली थी जिसके बाद सेना की 22 आरआर, एसओजी सोपोर और सीआरपीएफ 179, 177 और 92 बटालियन की एक संयुक्त टीम ने वारपोरा में घर-घर में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया।

सतवारी के एयर फोर्स स्टेशन और पास के ही मशहूर पीर बाबा की दरगाह के ऊपर एक के बाद एक दो ड्रोन (Drone) उड़ते दिखाई दिए। इसने फिर पाक की भारत विरोधी कुत्सित चालों व बदनियति को बेनकाब किया है।

सीमा पर तैनात जवान व अफसर हाई अलर्ट पर हैं। सीमा पार से आने वाले ड्रोन (Drone) को लेकर भी अति सतर्कता बरती जा रही है।

सेना के विश्वसनीय इनपुट के आधार पर तलाशी अभियान शुरू किया गया, जिसके कारण हाइवे से करीब 700 मीटर दूर 30 किलोग्राम आईईडी बरामद किया गया।

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ऐसे ड्रोन (Drone) का इस्तेमाल जम्मू कश्मीर की सीमा में छिपे अपने आतंकियों को हथियार पहुंचाने के अलावा ड्रग्स और पैसे पहुंचाने के लिए करता है।

दो जुलाई को भी पाकिस्तान के क्वाडकॉप्टर (Drone) ने अरनिया सेक्टर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश की थी, लेकिन बीएसएफ के जवानों द्वारा गोली चलाए जाने के बाद वह पीछे हट गया था।

पाक खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर लश्कर–ए–तैयबा‚ जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठन अब ड्रोन के जरिए भी बड़े हमलों (Drone Attack) को अंजाम देने की फिराक में हैं।

27 जून को वायु सेना स्टेशन (Air Force Station)  पर किए गए हमले में प्रयुक्त आईडी में ‘निश्चित तौर' पर पाक सेना की विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया गया है।

बडगाम पुलिस ने जिस आतंकी सहयोगी (Terrorist Associates) को गिरफ्तार किया है, वह लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों का करीबी है। पुलिस ने इस आरोपी के पास से विस्फोटक सहित कई आपत्ति जनक सामग्री जब्त की है। 

वायु सेना के आरएफआई में कहा है कि Counter-UAS  का मकसद शत्रुतापूर्ण मानव रहित हवाई वाहन का पता लगाना‚ ट्रैक करना‚ पहचानना‚ नामित करना और बेअसर करना है।

धर्मांतरण को लेकर पूछे गये सवाल के जवाब में राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने कहा कि मतांतरण कराने के किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जायेगा।

खुफिया एजेंसियों ने बताया है कि पाकिस्तानी सेना की मदद से गुलाम कश्मीर में आतंकियों को रॉकेट लॉन्चर और ड्रोन की मदद से हमला करने की ट्रेनिंग दी जा रही है।

यह अनिवार्य है कि सभी सामाजिक व सांस्कृतिक क्षेत्र के जमावड़ों में ड्रोन (Drone) के इस्तेमाल को रोका जाए, जिससे जीवन या संपत्ति के नुकसान के किसी भी संभावित खतरे को खत्म किया जा सके।

ड्रोन हमले (Drone Attack) को एक सस्ता और असान विकल्प (Option) माना जाता है। इसीलिए ड्रोन का इस्तेमाल अब तेजी से बढ़ रहा है।

जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर हुए ड्रोन हमलों (Drone Attack) को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। यह खुलासा जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के डीजीपी दिलबाग सिंह ने 2 जुलाई को किया।

जम्मू (Jammu) में अरनिया सेक्टर के पास एक बार फिर ड्रोन (Drone) देखा गया है। यह इलाका अंतर्राष्ट्रीय सीमा (International Border) के पास मौजूद है।

भारत में हमले के लिए एक खास किस्म का ड्रोन पीओके में तैयार किया जा रहा था। यह ड्रोन तीन किमी तक आईईडी ले जाने में सक्षम था। ड्रोन को नीचे लाने के साथ ब्लास्ट से उड़ाया जा सकता था।

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