chinese army

Anti-Tank Missiles: युद्ध में मशीनें चाहे कितनी ही एडवांस क्यों न हो लेकिन युद्ध में जीत सैनिकों की हिम्मत और पराक्रम के चलते ही होती है। एलओसी और एलएसी पर कई मौकों पर एंटी टैंक मिसाइल तैनात की जाती रही हैं।

भारत और चीन के रिश्ते बीते कुछ सालों में खराब हुए हैं। सीमा विवाद के चलते चीन हमारे खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाए हुए है। चीन हमेशा से विस्तारवादी की नीति को फॉलो करता आया है।

जिस वक्त तिब्बत (Tibet) में 14वें दलाई लामा को चुनने की प्रक्रिया चल रही थी तभी यह हमला किया गया था। चीन नहीं चाहता था कि तिब्बत में फिर से चुनावी प्रक्रिया के जरिए दलाई लामा यानी धर्मगुरु की नियुक्ति हो।

चीन की बढ़ती ताकत सबको साफ नजर आ रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में चीन दुनिया की सुपर पॉवर होगा और इसमें उसकी सैन्य ताकत का अहम रोल होगा।

पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक है। इसमें करीब 23 लाख सैनिक हैं। इनमें थल, जल, वायु, रॉकेट फोर्स और रणनीतिक सपोर्ट सेना शामिल हैं।

Indo-China War: 1962 के दौरान चीनी सेना ने जगह-जगह पोस्ट और सड़क का निर्माण कर दिया था जिसके जवाब में भारतीय सेना ने भी पोस्ट बना ली थी।

भारतीय शस्‍त्र सेनाओं की सर्वोच्‍च कमान भारत के राष्‍ट्रपति के पास है। राष्‍ट्र की रक्षा का दायित्‍व मंत्री मंडल के पास होता है। इसके निर्वहन रक्षा मंत्रालय से किया जाता है। 

1967 में भारत और चीन के बीच संबंध पहले से तनावपूर्ण थे। नाथू ला से सेबु ला दर्रे के साथ सीमा पर कंटीले तार लगाने से चिढ़कर चीनियों ने भारतीय जवानों के साथ धक्का-मुक्की की थी। 

चीनी सेना (Chinese Army) भारतीय सेना (Indian Army) के खिलाफ झड़प के दौरान लोहे की रॉड का इस्तेमाल करती है। इन रॉड पर कीलें लगी होती हैं।

India China Tension: सीमा विवाद ही दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प की मुख्य वजह रहा है। 1962 के बाद दोनों देशों के बीच अबतक कई बार झड़प हो चुकी है। 

पूर्वी तुर्किस्तान, तिब्बत, इनर मंगोलिया, ताइवान, हॉन्गकॉन्ग और मकाउ पर की कई जमीन पर चीन का कब्जा है। ऐसा चीन घुसपैठ और बलपूर्वक किया है। 

1967 में भारत और चीन के बीच ऐसा आखिरी सैन्य संघर्ष हुआ था जिसमें दोनों तरफ के सैनिक मारे गए थे। 1967 के युद्ध में चीन के 400 सैनिक मारे गए तो भारत के सिर्फ 90 सैनिक शहीद हुए थे।

भारत 1962 में चीन के खिलाफ युद्ध (War of 1965) में बुरी तरह से हारा था। चीन से युद्ध के तीन साल बाद पाकिस्तान ने भारत को कमजोर समझते हुए बड़ी भूल कर दी थी।

चीनी सेना भारत से 'हैंड टू हैंड' में मुकाबला नहीं कर पाई थी। इसमें कई चीनी सैनिक ढेर हुए थे। हमारे जवानों ने बेहद धारधार हथियार खुखरी का इस्तेमाल किया था।

भारत और चीन के बीच एक मात्र युद्ध 1962 में लड़ा गया था। हमेशा से विस्तारवादी की नीति पर काम करने वाला चीन उस दौरान भी भारत के कब्जे वाले इलाकों को हड़पना चाहता था, जिसमें वह कामयाब भी हुआ।

सैन्य मोर्चे पर हमारे सैनिक कमजोर थे। वे तैयार नहीं थे, उन्हें सरहद पर भेजा गया। उनके पास दूसरे विश्वयुद्ध के दौर की बंदूकें थीं, चीनियों के पास एके-47 थीं।

भारतीय सैनिकों के पास ठंड से बचने के लिए न ही कपड़े थे और न ही जूते। नतीजन भारत को भारी नुकसान झेलना पड़ा। इस युद्ध में हमारे 1300 सैनिक शहीद हुए थे।

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