Chattisgarh

छत्तीसगढ़ के नक्सल (Naxalites) प्रभावित इलाकों में प्रशासन द्वारा चलाये जा रहे नक्सल विरोधी अभियान और पुनर्वास नीति का लगातार सकारात्मक परिणाम नजर आ रहा है।

छत्तीसगढ़ में कोरोना ने नक्सली (Naxali) इलाकों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। यहां बीते कुछ दिनों में ही 10 से ज्यादा नक्सलियों की मौत हुई है।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh)  के बीजापुर में 3 अप्रैल को हुए नक्सली हमले (Naxal Attack) में 22 जवान शहीद हो गए। इस हमले ने पूरे देश को दहला कर रख दिया है।

साल 2017 में भी आरिफ एच शेख (IPS Arif H Sheikh) को पेंसिल्वेनिया में उनके अभियान आमचो बस्तर, आमचो पुलिस” के लिए उन्हें यह सम्मान दिया गया। आईएसीपी द्वारा दिए जाने वाले इस अवार्ड पर लगातार दो सालों से छत्तीसगढ़ पुलिस का कब्जा रहा।

श्यामगिरी गांव के पास प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन ने विस्फोट किया था। इस विस्फोट में भाजपा विधायक भीमा मांडावी की मौत हो गई थी।

पहले भी कई बार इस रूट की सड़क को नक्सलियों ने नुकसान पहुंचाया है। बहरहाल अब एक बार फिर ग्रामीणों को लंबा सफर तय करके दूसरी जगहों पर जाना होगा।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के गरियाबंद जिले में पुलिस ने एक बार फिर नक्सलियों के नापाक मंसूबों पर पानी फेर दिया। एक बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए नक्सलियों द्वारा लगाए गए दो आईईडी (IED) को पुलिस ने डिफ्यूज कर दिया।

नक्सल कैडर में 50 फीसदी महिलाएं हैं। वे पितृसत्तात्म समाज की जबरदस्ती थोपी जानेवाली कुरीतियों का विरोध करती हैं। मर्जी के खिलाफ शादी से बचने के लिए वे घर से भाग जाती हैं और माओवादी संगठनों में शामिल हो जाती हैं।

भरोसा जीतने के लिए आपस में बातचीत जरूरी होती है। गांव को नक्सल-मुक्त कर वहां शांति बहाल करने का जवानों का मकसद बिना गांव वालों के सहयोग के संभव नहीं था। वहां की बोली हल्बी है और जवानों को यह बोली बिल्कुल नहीं आती थी।

माओवादी दलम के कमांडर दंपति ने अदिलाबाद के निर्मल जिला पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

दूसरी तरफ सरकार की पुनर्वास की योजना भी बहुत काम कर रही है। समर्पण करने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं जिसका फायदा दिख रहा है।

नए मुखिया के कमान संभालने के बाद नक्सली संगठन में सीनियर नक्सलियों का कद घटता जा रहा है। यही फूट की वजह बन रहा है।

कमर के नीचे का हिस्सा बुरी तरह जख्मी होने के बावजूद भृगुनंदन चौधरी (Constable Bhrigu Nandan Choudhary) के हौसले पस्त नहीं हुए। वे असहनीय दर्द के बावजूद रेंगते हुए आगे बढ़ते रहे और उन्होंने आधा दर्जन नक्सलियों को मार गिराया।