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सूत्रों के मुताबिक, आईटीबीपी का कहना कि अगर उसके जवानों की तैनाती आंतरिक सुरक्षा के कामों में जारी रही, तो उन्हें एक अच्छा ब्रेक मिलेगा।

दरअसल बैन किए गए ऐप्स पर आरोप है कि वह भारतीय यूसर्स का डाटा चीन की खुफिया एजेंसियों के साथ शेयर करते थे।

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