पूरा खानदान नक्सली, अपराध ऐसे कि जानकर उड़ जाएंगे होश, जानिए कौन था रमन्ना….

30 सालों से लाल आतंक का सबसे बड़ा चेहरा रहे कुख्यात नक्सली कमांडर रावुला श्रीनिवास उर्फ रमन्ना (Ramanna) की मौत हो गई है। रमन्ना की मौत की खबर पर कई दिनों तक चले सस्पेंस के बाद आखिरकार इसकी पुष्टि हो गई।

Ramanna

30 सालों से लाल आतंक का सबसे बड़ा चेहरा रहे कुख्यात नक्सली कमांडर रावुला श्रीनिवास उर्फ रमन्ना (Ramanna) की मौत हो गई है।

30 सालों से लाल आतंक का सबसे बड़ा चेहरा रहे कुख्यात नक्सली कमांडर रावुला श्रीनिवास उर्फ रमन्ना (Ramanna) की मौत हो गई है। रमन्ना की मौत की खबर पर कई दिनों तक चले सस्पेंस के बाद आखिरकार इसकी पुष्टि हो गई। नक्सली नेता विकल्प ने 12 दिसंबर को इसकी पुष्टि की।

Ramanna
खूंखार नक्सली रमन्ना (फाइल फोटो)।

रमन्ना (Ramanna) सीपीआई (माओवादी) की सेंट्रल कमिटी का सदस्य था। रमन्ना की मौत नक्सली संगठन के लिए अब तक का सबसे बड़ा नुकसान है। रमन्ना की मौत के सस्पेंस की कहानी हम आपको बताएंगे, पर उससे पहले पढ़िए कौन था रमन्ना….

सबसे बड़े नक्सली हमले का सरगना-

तेलंगाना के वारंगल जिले के रावुला श्रीनिवास ने 15 साल की उम्र में हथियार उठा लिया था और बन गया था रमन्ना (Ramanna)। तभी से वह दक्षिण बस्तर के सुकमा और बीजापुर जिले के जंगलों में सक्रिय रहा। 2005 से अब तक उस इलाके में हुई लगभग सभी बड़ी वारदातों का मास्टरमाइंड उसे माना जाता है। 6 अप्रैल, 2010 को सुकमा जिले के ताड़मेटला में उसने सीआरपीएफ की एक कंपनी पर हमला किया था। जिसमें 76 जवानों की मौत हो गई। इसके अलावा, मार्च 2014 में सुकमा जिले में जीरुम नाला में हुए नक्सली हमले में रमन्ना (Ramanna) का हाथ था, जिसमें 16 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। अप्रैल, 2017 में बुर्कापाल में भी रमन्ना ने नक्सली हमला करवाया था, जिसमें 25 सीआरपीएफ जवानों की शहादत हुई थी। इतना ही नहीं, दरभा घाटी में कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमले को अंजाम देने में उसका हाथ माना जाता है। उसके खिलाफ बस्तर में 1989 से 2015 के दौरान करीब 150 सुरक्षा बलों की हत्या एवं लूट के 32 गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं।

30 सालों से था सक्रिय-

रमन्ना (Ramanna) पिछले लगभग 30 सालों से बस्तर क्षेत्र में सक्रिय था। वह साल 1982 में नक्सली संगठन से जुड़ा और 1988 में दंडकारण्य आया। 1988 में ही वह ‘सुकमा कोंटा दलम’ का कमांडर बन गया। 1998 में उसका प्रमोशम हुआ और वह साउथ बस्तर जोनल कमिटी का सेक्रेट्री बन गया। उसे वर्ष 2011 में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सचिव बनाया गया था और 2013 में वह सीपीआई (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सदस्य बन गया।

पूरा खानदान है नक्सली-

साल 1994 में उसने साथ काम करने वाली नक्सली सोडी हिडमे उर्फ सावित्री से शादी कर ली। सावित्री फिलहाल किस्तारम एरिया कमिटी की सेक्रेट्री है। रमन्ना (Ramanna) का बेटा श्रीकांत उर्फ रंजीत भी पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी बटालियन में काम करता है। रमन्ना का भाई परशरामुलु भी एक नक्सली नेता था और 1994 में एक मुठभेड़ में मारा गया।

दरअसल, रमन्ना (Ramanna) की मौत पर कई दिनों तक बड़ा सस्पेंस बना हुआ था। बताया जा रहा था कि 7 दिसंबर को उसकी मौत हार्ट अटैक से हुई। पुलिस और खुफिया एजेंसियों के पास यह सूचना थी कि तेलंगाना से सटे बीजापुर जिले के जंगल में 9 दिसंबर को अंतिम संस्कार किया गया, लेकिन नक्सली इस मामले में चुप्पी साधे हुए थे। वहीं पुलिस का कहना है कि जब भी किसी नक्सली नेता की मौत होती है तो उनकी जीवनी का प्रकाशन नक्सली करते हैं और पूरी कहानी बताते हैं। पर नक्सली नेताओं की ओर से भी इस बात की पुष्टि नहीं की जा रही थी। रमन्ना की हार्ट अटैक से मौत की खबर के बाद दो दिन से छत्तीसगढ़ व तेलंगाना पुलिस 10 दिसंबर को सोशल मीडिया में खबर चलने लगी कि तेलंगाना के कोत्तागुड़म जिले के एसपी सुनील दत्त ने रमन्ना की मौत की पुष्टि कर दी है।

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हालांकि बाद में तेलंगाना पुलिस ने भी साफ कर दिया कि अधिकारिक पुष्टि नहीं है। बस्तर आइजी सुंदरराज पी ने कहा कि रमन्ना (Ramanna) नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का सदस्य था। अगर उसकी मौत हुई है तो नक्सली इसे क्यों छिपाएंगे? दो दिन से रमन्ना की मौत की खबर चल रही है। अगर यह सच न होती तो अब तक नक्सलियों ने खंडन कर दिया होता। आईजी ने कहा कि हम उसका शव तो बरामद नहीं कर सकते कि तुरंत पुष्टि कर दें। खुफिया एजेंसियों को गांव से इनपुट आ रहे हैं। रमन्ना (Ramanna) इतना शातिर था कि पुलिस उसकी कोई हालिया तस्वीर तक हासिल नहीं कर पाई थी। रमन्ना की मौत की खबरों के बाद रमन्ना की जो तस्वीर सामने आई है वह बहुत ही पुरानी है।

पुलिस इसी तस्वीर का इश्तहार जारी करती थी पर वह पकड़ में नहीं आता था। इससे पहले भी कई बार उसके बीमारी से मौत होने और मुठभेड़ में मौत होने की अफवाह फैल चुकी थी। यही वजह थी कि उसकी मौत पर लंबे समय तक सस्पेंस बना हुआ था। हालांकि नक्सली नेता विकल्प ने 12 दिसंबर को इसकी पुष्टि कर दी। लेकिन एक बात अब भी गले के नीचे नहीं उतर रही कि इतने दुर्दांत नक्सली की मौत हार्ट अटैक से हुई है या कोई और वजह है!

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