झारखंड: नक्सलियों पर नकेल कसने की तैयारी, CM सोरेन ने इस प्रस्ताव को दी मंजूरी

नक्सलियों (Naxalites) ने डरा-धमकाकर लेवी वसूली और लेवी नहीं मिलने पर विकास कार्यों में लगे वाहनों को आग के हवाले कर संसाधनों को भी बहुत नुकसान पहुंचाया है।

Naxalites

सांकेतिक तस्वीर।

प्रशासन के दबाव और सरकार की आत्मसमर्पण नीतियों से प्रभावित होकर कई नक्सलियों (Naxalites) ने सरेंडर कर दिया है। राज्य के नक्सलियों और उग्रवादियों के मामले में शीघ्र सजा देने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने  भी बड़ा कदम उठाया है।

झारखंड (Jharkhand) देश का ऐसा राज्य है जहां खनिज संपदा के साथ-साथ घने जंगल भी हैं। बिहार से अलग होकर राज्य के पुनर्गठन के पहले से ही यह लाल आतंक (Naxalism) का दंश झेल रहा है। नक्सलियों (Naxalites) ने राज्य के कई इलाकों में खूनी खेल खेलकर दहशत तो फैलाई ही है, साथ ही ये नक्सली राज्य में किए जा रहे विकास कार्यों में भी सबसे बड़ी बाधा बने।

इन सालों में नक्सलियों (Naxalites) ने डरा-धमकाकर लेवी वसूली और लेवी नहीं मिलने पर विकास कार्यों में लगे वाहनों को आग के हवाले कर संसाधनों को भी बहुत नुकसान पहुंचाया है। पर, अब सरकार ने नक्सलियों (Naxals) को राज्य से उखाड़ फेंकने के लिए कमर कस ली है।

बीते 5 सालों में इन नक्सलियों के खिलाफ राज्य सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। पुलिस और प्रशासन भी नक्सलियों पर शिकंजा कसने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। पुलिस ने अब तक कई बड़े नक्सलियों (Naxalites) को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।

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इसके अलावा प्रशासन के दबाव और सरकार की आत्मसमर्पण नीतियों से प्रभावित होकर कई नक्सलियों (Naxals) ने सरेंडर कर दिया है। राज्य के नक्सलियों और उग्रवादियों के मामले में शीघ्र सजा देने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने बड़ा कदम उठाते हुए सबंधित मामलों की सुनवाई के लिए राजधानी रांची में एक विशेष न्यायालय के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

बताया जा रहा है केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से विशेष न्यायलय के गठन के लिए अनुरोध किया गया था। जानकारी के मुताबिक, नक्सली मामलों के निपटारे के लिए यह सीबीआई (CBI) और एनआईए (NIA) की तर्ज पर विशेष अदालत होगी।

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