झारखंड: ये है नक्सलवाद का असली चेहरा, लैंडमाइंस विस्फोट की चपेट में आए कई मासूम

झारखंड के गुमला, लोहरदगा, लातेहार और चतरा के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में और जंगली इलाकों में नक्सलियों (Naxalites) द्वारा जगह-जगह बिछाए गए लैंडमाइंस विस्फोट से कई लोगों की मौत हो चुकी है।

Naxalites

आतंक और दहशत का खेल खेलने वाले नक्सलियों ने हमेशा निर्दोष और मासूम लोगों को सताया है।

आतंक और दहशत का खेल खेलने वाले नक्सलियों ने हमेशा निर्दोष और मासूम लोगों को सताया है। झारखंड के गुमला, लोहरदगा, लातेहार और चतरा के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में और जंगली इलाकों में नक्सलियों (Naxalites) द्वारा जगह-जगह बिछाए गए लैंडमाइंस विस्फोट से कई लोगों की मौत हो चुकी है।

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आतंक और दहशत का खेल खेलने वाले नक्सलियों ने हमेशा निर्दोष और मासूम लोगों को सताया है।

झारखंड में जल, जंगल, जमीन को बचाने के नाम पर व्यवस्था परिवर्तन का दंभ भरने वाले नक्सलियों (Naxalites) की खोखली विचारधारा अब लोगों की समझ में आ गई है। आतंक और दहशत का खेल खेलने वाले नक्सलियों ने हमेशा निर्दोष और मासूम लोगों को सताया है। झारखंड के गुमला, लोहरदगा, लातेहार और चतरा के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में और जंगली इलाकों में नक्सलियों (Naxalites) द्वारा जगह-जगह बिछाए गए लैंडमाइंस विस्फोट से कई लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, कई ने अपने हाथ-पैर गंवा दिए हैं। नक्सलियों की इस बर्बरता और उनकी कायराना हरकतों से तबाह हुए लोगों की पीड़ा दिल दहला देने वाली है। उनके कृत्य से आहत लोगों का जीवन बद से बदतर होकर रह गया है।

नक्सलियों द्वारा किए गए लैंडमाइंस विस्फोट की चपेट में आए कई मासूम

इन सब घटनाओं से यह बात तो बिल्कुल साफ हो जाती है कि इन नक्सलियों (Naxalites) का मानवीय धर्म से कोई लेना देना नहीं है। बता दें कि कुछ दिनों पहले ही लातेहार के बरवाडीह के मुरवाई कला जंगल में मां के साथ लकड़ी चुनने गई 6 साल की सोनम बम के चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गई थी। वहीं, मंगलेश्वर नागेशिया की मौत ऐसे ही एक लैंडमाइंस विस्फोट से हो गई थी। इस विस्फोट में उसकी पत्नी सुधा नगेसिया और बेटा पुनीत नागेशिया भी घायल हो गए थे।

आज इस परिवार को देखने वाला कोई नहीं है। इसके अलावा, 13 दिसंबर, 2019 को लोहरदगा और लातेहार सीमा के बुलबुल जंगल में बांस चुने गए आदिम जनजाति समाज की पहाड़िया जाति के कई लोग नक्सलियों (Naxalites) द्वारा किए गए आईडी ब्लास्ट की चपेट में आ गए थे। इसमें लातेहार थाना क्षेत्र के घंघरी गांव निवासी एतवा उरांव की मौत हो गई वहीं सूरज घायल हो गया था।

ये है नक्सलवाद का असली चेहरा
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मोहम्मद अजहर।

पुलिस और सुरक्षाबल के कई जवान भी इन विस्फोटों की चपेट में आए हैं। चतरा के प्रतापपुर थाना क्षेत्र के चरका कला गांव निवासी मोहम्मद अजहर उर्फ शहजाद भी लैंडमाइंस विस्फोट से घायल हो गए। लैंडमाइन विस्फोट में घायल मोहम्मद अजहर उर्फ शहजाद आज दूसरों के भरोसे में जिंदगी यापन कर रहे हैं। शहजाद पुलिस एसपीओ के पद पर तैनात थे। 13 मार्च, 2014 को बारूदी सुरंग डिफ्यूज करने के दौरान ब्लास्ट हो गया था।

इस विस्फोट में अजहर के दाएं पैर और एक आंख में क्षति पहुंची थी। रांची के अपोलो अस्पताल में उनका इलाज कराया गया। शहजाद ने बताया, “पत्नी और तीन बच्चों का जीवन यापन करना अब मुश्किल हो गया है। पूरी तरह भाइयों पर आश्रित हो चुका हूं। पैसे के अभाव में आंख का इलाज भी नहीं करा पा रहा।” नक्सलियों की इन काली करतूतों का खामियाजा और कितने ही मासूम भुगत रहे हैं। कितने बच्चे अनाथ हो चुके हैं, कितनी औरतें विधवा हो गईं और न जाने कितने ही परिवार तबाह हो गए हैं। नक्सलियों (Naxalites) और नक्सलवाद का यही असली चेहरा है।

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