Jharkhand: नक्सलियों के गढ़ में पहुंची पुलिस, लोगों को दिखी उम्मीद की नई किरण

जो इलाका कल तक लाल आतंक के साए में था, जहां लोगों को हर पल नक्सलियों (Naxals) के दहशत में जीना पड़ता था, आज वहां शांति आ रही है और क्षेत्र विकास की ओर बढ़ रहा है।

Naxals

पर अब वक्त बदलन गया है। अब यहां के लोग जिंदगी को खुल कर जीना शुरू कर चुके हैं। एसपी सुरेन्द्र कुमार झा के अनुसार, आने वाले 6 माह में इन नक्सल प्रभावित गांवों की दिशा और दशा दोनों बदलेंगे।

जो इलाका कल तक लाल आतंक के साए में था, जहां लोगों को हर पल नक्सलियों (Naxals) के दहशत में जीना पड़ता था, आज वहां शांति आ रही है और क्षेत्र विकास की ओर बढ़ रहा है। झारखंड (Jharkhand) के गिरिडीह जिले के पारसनाथ पहाड़ की तलहटी में बसे गांव और कस्बे घने जंगलों और पठारों से घिरे हैं। इन इलाकों में नक्सलियों का बोल-बाला रहता है।

पर पारसनाथ पहाड़ के नीचे बसे प्राकृतिक सौंदर्य से भरा चकरबराई, टेसाफूली और मोहनपुर जैसे गांवों में अब फिजा बदल रही है। हालांकि यह कार्य इतना आसान नहीं था। कहते हैं न- जहां चाह, वहां राह। इसी कहावत को चरितार्थ करते हुए पुलिस की टीम के अथक प्रयास ने क्षेत्र में सक्रिय नक्सलियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

झारखंड: लातेहार में सुरक्षाबलों के साथ एनकाउंटर, जान बचाकर भागे नक्सली

नक्सलियों (Naxals) के मंसूबों पर पानी फेरते हुए उनके ही घरों तक अपनी पहुंच बना कर विकास का परचम लहराना गिरिडीह के वर्तमान पुलिस कप्तान सुरेंद्र कुमार झा के कुशल नेतृत्व में संभव हुआ है। पारसनाथ एक्शन प्लान एवं जिला स्तरीय गठित एससीए टीम की स्वीकृति के बाद इन बीहड़ों और उबड़-खाबड़ पथरीले इलाके के गांवो में सड़क बनाने का कार्य शुरू हो चुका है।

आने वाले 6 महीनों में इन नक्सलग्रस्त क्षेत्रों में सरपट गाड़ियां दौड़ने लगेंगी। बता दें कि टेसाफुली गांव एक करोड़ के इनामी नक्सली कुख्यात विवेक जी का इलाका है। यहां के आस-पास के क्षेत्रों में वह नक्सलवाद का बीज बोता आया है। टेसाफूली गांव में ही 10 लाख के इनामी नक्सली प्रशांत मांझी का घर भी है।

जम्मू-कश्मीर: सुरक्षाबलों से हुई मुठभेड़ में 4 आतंकी ढेर, अकेले अप्रैल माह में 26 आतंकी मारे गए

बीते मंगलवार को इसी गांव में पहुंचकर गिरिडीह पुलिस कप्तान ने लोगों में राशन और भोजन के साथ-साथ साबुन, सेनेटाइजर, मास्क आदि वितरित किया एवं लोगों का स्वस्थ जांच भी करवाया। इसके अलावा, गांव के लोगों को मुफ्त दवाईयां भी दी गईं। इन दोनों इनामी नक्सलियों के गांव में अपनी पहुंच बनाकर पुलिस ने लोगों की जिस तरह मदद की है, शायद नक्सलियों (Naxals) ने कभी ऐसा सोचा भी नहीं होगा।

क्या महिला ,क्या पुरुष और क्या नन्हें बच्चे, सभी एसपी के एक बुलावे पर बेखौफ टेसाफुली स्थित सरकारी विद्यालय परिसर में पहुंच गए थे। पहले यही ग्रामीण नक्सलियों (Naxals) के डर के साए में जी रहे थे। पर अब वक्त बदलन गया है। अब यहां के लोग जिंदगी को खुल कर जीना शुरू कर चुके हैं। एसपी सुरेन्द्र कुमार झा के अनुसार, आने वाले 6 माह में इन नक्सल प्रभावित गांवों की दिशा और दशा दोनों बदलेंगे।

बताते चलें कि क्षेत्र में कुख्यात नक्सली अजय महतो के दस्ते के सदस्य का कुख्यात विवेक जी, प्रशांत मांझी, नंदलाल, रणवीर और कृष्णा जैसे हार्डकोर नक्सली पारसनाथ के इन इलाकों में सक्रिय हैं। इन नक्सलियों को अब समझ आ गया है कि भोले-भाले लोगों को बेवकूप बनान आसान नहीं है। पुलिस और प्रशासन इन लोगों के साथ हर वक्त खड़ा है। सुरक्षाबलों की मुस्तैदी से नक्सलियों (Naxals) के हाथ-पांव फूल रहे हैं और उनकी हिम्मत अब धीरे-धीरे टूट रही है। वह दिन दूर नहीं जब यह इलाका पूरी तरह नक्सल-मुक्त होगा और विकास की नई उड़ान भरेगा।

यह भी पढ़ें