Exclusive: 25 लाख के पूर्व इनामी नक्सली ने खोली नक्सलवाद की पोल, कहा- ये क्रांतिकारी नहीं बल्कि स्वार्थी संगठन हैं

ये खबर 25 लाख के पूर्व इनामी (Naxalites) नक्सली विष्णु देव यादव उर्फ छोटा विकास उर्फ चश्मा विकास उर्फ दिनेश उर्फ उमेश के बारे में है।

Naxalites

25 लाख का पूर्व इनामी नक्सली विष्णु देव यादव

विष्णु ने देखते ही देखते कई नक्सली (Naxalites) घटनाओं को अंजाम दिया और उसे नक्सली संगठन में रीजनल कमेटी का सदस्य बनाते हुए कई जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

रांची: झारखंड में नक्सलियों (Naxalites) के खिलाफ अभियान जारी है। इस बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिससे नक्सलवाद का सच जनता के सामने आ गया है। ये खबर 25 लाख के पूर्व इनामी नक्सली विष्णु देव यादव उर्फ छोटा विकास उर्फ चश्मा विकास उर्फ दिनेश उर्फ उमेश के बारे में है। इस खबर में हमें पता लगेगा कि कैसे एक छात्र को नक्सली बनने पर मजबूर कर दिया गया।

पलामू जिले के मनातू प्रखंड का भितरीडीह गांव का रहने वाला विष्णु देव यादव जब कॉलेज पहुंचा तो उस दौरान कॉलेज में क्रांतिकारी छात्र संगठन के नाम पर एक संगठन चलाया जा रहा था। इस संगठन में कॉलेज के ज्यादातर छात्र शामिल थे।

विष्णु देव के मुताबिक, छात्र संगठन के कुछ लोग आंतरिक रुप से प्रतिबंधित नक्सलवादी (Naxalites) संगठन एमसीसी से जुड़े थे। उस समय कॉलेज के छात्र संगठन के कुछ छात्रों ने धोखे से विष्णु को नक्सली नेता भरत जी से मिलवाया। भरत जी ने विष्णु को क्रांतिकारी भाषण देकर अपनी तरफ आकर्षित कर लिया। इसके बाद विष्णु ने छात्र से नक्सली बनने के बारे में ठान लिया और कलम छोड़कर बंदूक उठाने का फैसला किया।

विष्णु ने साल 2005 में माओवादी संगठन एनसीसी को ज्वाइन किया। भरत जी के नेतृत्व में उसे कई तरह की ट्रेनिंग मिलीं। इसके बाद विष्णु नक्सलियों के बीच प्रसिद्ध होने लगा।

विष्णु ने देखते ही देखते कई नक्सली घटनाओं को अंजाम दिया और उसे नक्सली संगठन में रीजनल कमेटी का सदस्य बनाते हुए कई जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

विष्णु के नक्सली कारनामों की वजह से सरकार ने उस पर 25 लाख का इनाम घोषित किया। समय बीतने के साथ विष्णु को नक्सल संगठनों की खोखली विचारधारा दिखाई देने लगी। नक्सली नियम कायदों को दरकिनार करके अपने स्वार्थ के लिए लोगों की हत्या कर रहे थे। ये सब देखकर विष्णु का मन नक्सली संगठन से ऊब गया।

ऐसे में विष्णु ने अपने मन की बात अपने एक परिजन को बताई। घरवालों ने इस बात की सूचना पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने सरेंडर नीति के तहत विष्णु से सरेंडर करने के लिए कहा।

12 अप्रैल 2016 को पुलिस अधिकारियों से प्रेरित होकर डीआईजी साकेत कुमार सिंह और तत्कालीन पलामू के एसपी अनूप बिरथरे के सामने विष्णु ने सरेंडर कर दिया। सरेंडर करने के बाद विष्णु का जीवन बदल गया।

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अब विष्णु देव यादव का कहना है कि हमें अपने ही लोगों ने रास्ते से भटकाकर नक्सलवादी (Naxalites) रास्ता दिखाया। अगर उस समय हमने गहराई से सोचा होता तो आज हम किसी सरकारी नौकरी में होते और हमारा परिवार सुखी होता। आज मुझे आत्मग्लानि होती है कि मेरे ऊपर नक्सली होने का ठप्पा लग गया है।

विष्णु ने नक्सलियों से अपील करते हुए कहा कि जो लोग भी नक्सली संगठन में हैं, वे संगठन को छोड़कर मुख्यधारा में आएं और सामाजिक जीवन का लाभ लें। विष्णु ने ये भी कहा कि माओवादी संगठन अब क्रांतिकारी नहीं बल्कि स्वार्थी संगठन बन चुका है।

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