छत्तीसगढ़: नक्सलियों ने 20 सालों में 1700 से ज्यादा ग्रामीणों की हत्या की, सामने आया असली चेहरा

हैरानी की बात ये है कि नक्सली जिनकी मदद से यह काम करते हैं, उन्हें भी मौत के घाट उतारने से नहीं कतराते हैं।

Naxal Attack

सांकेतिक तस्वीर।

नक्सली जनता के बीच अदालत लगाकर कभी ग्रामीणों पर पुलिस का मुखबिर होने का आरोप लगाते हैं, तो कभी कोई दूसरा आरोप गढ़ देते हैं, इसके बाद नक्सली ग्रामीणों की हत्या कर देते हैं। कई बार नक्सली शक के आधार पर भी ग्रामीणों की हत्या कर देते हैं।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बस्तर से चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां बीते चार दशकों से नक्सली (Naxal) अपना वर्चस्व बरकरार रखने के लिए लगातार आतंक फैला रहे हैं। हैरानी की बात ये है कि नक्सली जिनकी मदद से यह काम करते हैं, उन्हें भी मौत के घाट उतारने से नहीं कतराते हैं।

अगर हम पिछले 20 सालों के आंकड़ों की बात करें तो नक्सलियों ने लगभग 1700 से अधिक निर्दोष ग्रामीणों को पुलिस का मुखबिर बताकर या अन्य कारणों का हवाला देते हुए, उनकी हत्या की है।

नक्सली जनता के बीच अदालत लगाकर कभी ग्रामीणों पर पुलिस का मुखबिर होने का आरोप लगाते हैं, तो कभी कोई दूसरा आरोप गढ़ देते हैं, इसके बाद नक्सली ग्रामीणों की हत्या कर देते हैं। कई बार नक्सली शक के आधार पर भी ग्रामीणों की हत्या कर देते हैं।

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बस्तर के आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि नक्सलियों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में दहशत फैलाकर धन की उगाही करना है और इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए नक्सली किसी भी हद तक जा सकते हैं। नक्सली अपने नापाक मंसूबों को पूरा करने के लिए पहले तो अपने आप को मासूम ग्रामीणों के सामने उनका मसीहा होने का ढोंग रचते हैं और ग्रामीणों के हक की लड़ाई लड़ने की बात कहते हुए उनको अपनी तरफ कर लेते हैं। फिर नक्सली धीरे-धीरे इनका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करने लगते हैं। जो ग्रामीण इनका विरोध करते हैं, उन्हें नक्सली मौत के घाट उतार देते हैं।

इससे ग्रामीणों के बीच नक्सलियों की दहशत भी बनी रहती है और वर्चस्व भी कायम रहता है। बीते 20 सालों में नक्सलियों ने ऐसे 1700 से अधिक मासूम ग्रामीणों की हत्या की है।

बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि समय में बदलाव के साथ साथ ग्रामीण भी जागरुक हो चुके हैं। ग्रामीण अब नक्सलियों का असली चेहरा पहचान चुके हैं। इसलिए ग्रामीणों ने अब नक्सलियों का विरोध करना शुरू कर दिया है। साथ ही अनजाने में नक्सली संगठन से जुड़े स्थानीय नक्सली भी अब आत्म समर्पण कर समाज की मुख्यधारा से जुड़कर पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर बस्तर के विकास में सहभागी बन रहे हैं।

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