छत्तीसगढ़: 6 महीने में एक बार थी परिवार से मिलने की अनुमति, संगठन की प्रताड़ना से तंग आकर नक्सली दंपति ने किया सरेंडर

नक्सल संगठन की प्रताड़ना से तंग आकर छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सली दंपति ने सरेंडर कर दिया। दोनों ने 7 जून को बीजापुर पुलिस के सामने अत्मसमर्पण कर दिया। डीआईजी सीआरपीएफ कोमल सिंह और पुलिस अधीक्षक कमलोचन कश्यप के सामने दोनों ने सरेंडर (Surrender) किया।

Surrender

नक्सल संगठन में प्रताड़ना से तंग आकर छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सली दंपति ने सरेंडर कर दिया।

नक्सल संगठन की प्रताड़ना से तंग आकर छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सली दंपति ने सरेंडर कर दिया। नक्सली प्लाटून नम्बर दो का सदस्य गोपी और उसकी पत्नी भारती ने नक्सलवाद (Naxalism) का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला लिया है। दोनों ने 7 जून को बीजापुर पुलिस के सामने अत्मसमर्पण कर दिया। डीआईजी सीआरपीएफ कोमल सिंह और पुलिस अधीक्षक कमलोचन कश्यप के सामने दोनों ने सरेंडर (Surrender) किया।

दोनों हैं 7 लाख के इनामी: गोपी मोड़ियामी गंगालूर एरिया कमेटी सदस्य है। हार्डकोर नक्सली (Hardcore Naxali) रहे गोपी पर प्रशासन की ओर से पांच लाख और उसकी पत्नी भारती पर दो लाख रूपये का इनाम घोषित है। इन दोनों को संगठन में रहते हुए प्यार हो गया था। दोनों ने शादी कर ली और मुख्य धारा में लौटने का फैसला किया।

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पखवाड़ेभर पहले ही कर दिया था सरेंडर: बता दें गोपी कि इन दोनों ने पखवाड़ेभर पहले ही बीजापुर पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था। पर पुलिस ने इन्हें मीडिया के सामने 7 जून को पेश किया। गोपी के साथ प्लाटून नंबर 2 की सदस्य भारती कट्टम ने भी सरेंडर कर दिया। पुलिस कप्तान कमलोचन कश्यप के अनुसार, गोपी पर 73 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके अलावा 50 स्थाई वारंट भी लंबित हैं। दो दर्जन से अधिक वारदातों में शामिल रहा गोपी के सरेंडर के पीछे प्रेम और प्रताड़ना दोनों है।

कई बड़ी वारदातों में रहा है शामिल: गंगालूर एरिया कमेटी सदस्य गोपी साल 2004 में ओडिशा के कोरापुट जिले के पुलिस लाइन थाना एवं प्रशिक्षण केंद्र पर अटैक और आर्म्स लूटने की घटना में शामिल था। मार्च, 2006 में मुरकीनार कैम्प पर अटैक में भी उसका हाथ था। इस घटना में 11 जवान शहीद हुए थे। इसके अलावा, साल 2006 में ही पामलवाया के पास रोड ओपनिंग पार्टी पर हुए हमले में वह शामिल थे। इसमें 6 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। साल 2007 में सलवा जुडूम अध्यक्ष बुधराम राणा और उसके पुत्र कमलेश्वर राणा की हत्या की घटना में गोपी का हाथ था। कुल 17 बड़ी घटनाओं में गोपी की संलिप्तता पाई गई है।

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गोपी के सरेंडर से नक्सलियों को लगा है बड़ा झटका:  एसपी के मुताबिक, गोपी के सरेंडर के बाद गंगालूर एरिया माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। पूछताछ में उसने कई राज भी खोले हैं। चेरकंटी का रहने वाला गोपी साल 2002 में माओवादी संगठन में भर्ती हुआ था। एलओएस सदस्य के रूप में कार्य करते हुए वह कई पदों पर रहा।

6 महीने में एक बार थी परिवार से मिलने की अनुमति: गोपी के मुताबिक, साल 2012 में गंगालूर एरिया कमेटी सचिव पद से हटाकर एसीएस सदस्य बना दिया गया। संगठन के वरिष्ठ माओवादियों से मतभेद तथा बस्तर क्षेत्र का होने के कारण बार-बार नीचा दिखाकर हर सलाह को नजर अंदाज किया जाता रहा। माओवादी संगठन का सबसे पुराना कार्यकर्ता होने के बाबजूद डीव्हीसीएम पद नहीं दिया गया। पार्टी में प्रत्येक तीन माह में सदस्यों को उसके परिवार से मिलने दिया जाता है, लेकिन उसे 6 माह में परिवार से मिलने की अनुमति दी जाती थी।

संगठन में बनाया जाता था दबाव: गोपी के साथ सरेंडर करने वाली भारती कट्टम 2003 में माओवादी संगठन की सदस्य बनी। वह आधा दर्जन से अधिक घटनाओं में शामिल रही थी। भारती साल 2006 में फरसेगढ़ में सलवा जुडूम कार्यकर्ता चिन्नाराम गोटा शक में उसके चालक की हत्या की घटना में भी शामिल थी। उसके खिलाफ बीजापुर के अलग-अलग थानों में 4 ममाले दर्ज हैं। उसके खिलाफ कुल 6 स्थाई वारंट लंबित है। भारती ने बताया कि संगठन में रहते हुए वह गोपी के साथ एक ही एरिया कमेटी में कार्य करने की इच्छुक थी, लेकिन संगठन ने उसकी मांग को खारिज करते हुए भैरमगढ़ एरिया कमेटी में काम करने का दबाव डाला।

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