छत्तीसगढ़: सरकार की पुनर्वास नीतियों से प्रभावित होकर कुख्यात नक्सली ने किया सरेंडर

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छत्तीसगढ़ के बस्तर में पुलिस को नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी मिली है। सरकार की पुनर्वास नीतियों से प्रभावित होकर डीकेएमएस अध्यक्ष मड़ियाम भीमा ऊर्फ कांछा भीमा ने आत्मसमर्पण कर दिया। बस्तर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान के तहत यह सफलता मिली है। उक्त नक्सली ने दंतेवाड़ा के एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव के सामने 20 सितंबर को आत्मसमर्पण किया। बस्तर के आईजी विवेकानंद सिन्हा के मुताबिक, आत्मसमर्पित नक्सली मड़ियम भीमा को साल 2004 में नक्सली कमांडर विनोद ने नक्सल संगठन में जनमिलिशिया सदस्य के रूप में भर्ती करवाया था। साल 2010 में उसे नक्सल संगठन डीकेएमएस का अध्यक्ष बनाया गया।

वह गुमियापाल इलाके में काम कर रहा था। नक्सली संगठन में रहकर वह आगजनी, हत्या, रेकी, सड़क तोड़ने और गांव के लोगों को बरगला कर नक्सली संगठन में शामिल करने का काम करता था। गौरतलब है कि, नक्सलवाद के खात्मे के लिए सरकार और प्रशासन ने पूरी तरह कमर कस लिया है। नक्सल उन्मूलन के लिए तरह-तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके तहत लोगों को जागरूक करने का काम भी किया जा रहा है। ताकि लोग नक्सलियों के बहकावे में आकर गलत रास्ते पर न जाएं। सरकार की पुनर्वास नीति भी नक्सलियों के आत्मसमर्पण के लिए बहुत ही कारगर साबित हो रही है।

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अभी हाल ही में झारखंड में इसी पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर 10 लाख के एक इनामी नक्सली भूषण यादव उर्फ चंद्रभूषण यादव ने सरेंडर किया है। भूषण यादव अपने नक्सली साथियों के साथ मिल कर कई बार पुलिस पर जानलेवा हमला कर चुका था। हथियार लूटने, बम विस्फोट करने, फायरिंग, विकास कार्यों में लगी मशीनों को आग के हवाले करने की कई नक्सली घटनाओं को भी इस दुर्दांत नक्सली ने अंजाम दिया था। भूषण यादव के खिलाफ गुमला जिले के चैनपुर, घाघरा, डुमरी, विशुनपुर, रायडीह एवं गुरदरी थाना में 17, लातेहार जिला के महुआडांड़, बारेसांड़ एवं नेतरहाट थाना में 5 तथा लोहरदगा जिले के सेन्हा थाना में 2 उग्रवादी कांड दर्ज हैं।

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