7 साल की उम्र से ली ट्रेनिंग, कई हत्याओं में शामिल महिला नक्सली ने सरेंडर के बाद बयां की भयानक दास्तान

सरेंडर के बाद अंजू ने बताया कि जब वो 7 साल की थी तब कुछ लोगों ने उसके भाई की हत्या कर दी थी। भाई की मौत का बदला लेने के लिए उसने इसी उम्र में नक्सली संगठन ज्वायन कर लिया।

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7 साल की उम्र में नक्सली संगठन से जुड़ी थी।

कहते हैं हिंसा और आतंक अपने पीछे सिर्फ स्याह यादें छोड़ जाता है। आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसी महिला नक्सली की जिसके अतीत ने उसे ऐसी खौफनाक यादें दी हैं जिसे याद कर वो आज भी सिहर उठती है। 22 अगस्त, 2019 को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर पुलिस को-ऑर्डिनेशन सेंटर में सबकी निगाहें एक महिला पर गड़ी थी।

अपने चेहरे को छिपाए इस महिला को पुलिस ने पकड़ा नहीं था बल्कि वो खुद अपने अतीत को छोड़ एक बेहतर आज की तलाश में यहां तक आई थी। नक्सली अंजू ने जब पुलिस के सामने सरेंडर किया तब प्रशासन ने भी राहत की सांस ली। बीहड़ों में एक भयानक जिंदगी गुजार कर आई अंजू ने अपने बीते हुए कल के बारे में जो कुछ भी बताया वो दहला देने वाला था।

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सरेंडर के बाद अंजू ने बताया कि जब वो 7 साल की थी तब कुछ लोगों ने उसके भाई की हत्या कर दी थी। भाई की मौत का बदला लेने के लिए उसने इसी उम्र में नक्सली संगठन ज्वायन कर लिया। लेकिन तब उसने कभी नहीं सोचा था कि एक खून का बदला लेने के लिए जिस राह पर वो चली है वहां हर कदम लहू बिखरा होगा।

नक्सलियों ने अंजू को सभी तरह के हथियार चलाने में ट्रेंड किया और फिर उसका इस्तेमाल बड़े-बड़े नक्सली ऑपरेशन्स को अंजाम देने में किया जाने लगा। 17 साल की उम्र में अंजू ने पहली बार पुलिस पार्टी पर हमला किया। साल 2007 में बीजापुर के रानी बोदली में 55 बहादुर जवानों की हत्या में भी अंजू शामिल थी। अंजू ने अपने साथियों के साथ मिलकर 35 हथियार भी लूटे। इसके बाद भी उसने कई हत्याएं की और कई बड़े हमलों में शामिल भी रही। नक्सलियों के लिए काम करते-करते अंजू की मुलाकात एक युवक से हुई और फिर दोनों ने एक दिन शादी रचा ली।

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अंजू ने खुलासा किया कि नक्सली बेहतर जिंदगी के सपने दिखाकर बच्चों और युवाओं को भटकाते हैं तथा अपने साथ ले जाते हैं। इन बच्चों को खौफनाक ट्रेनिंग दी जाती है और अगर कोई इसका विरोध करे तो उसकी हत्या तक कर दी जाती है। अंजू के मुताबिक नक्सल संगठन में माओवादी बच्चों को बाल संघम के रूप में शामिल कर संगठन का प्रचार-प्रसार करवाते हैं। गांव में बैठकें लेना, संगठन के लिए राशन गांव से मांग कर लाना, खाना बनाना और फिर संतरी का काम करना। यह सभी जिम्मेदारियां नए युवाओें या बच्चों को दी जाती हैं।

अंजू ने नक्सली बन कड़ी ट्रेनिंग ली थी और अब वो एक खूंखार नक्सली बन गई थी। सरकार ने उसके सिर पर 6 लाख रुपए का इनाम भी घोषित कर रखा था, लेकिन अब अंजू और उसके पति ने पुलिस के सामने सरेंडर कर नई जिंदगी को चुन लिया है।

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