झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में खोले जाएंगे 30 पुलिस कैंप, लोगों में उत्साह

नक्सलियों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले इलाकों में 30 नए पुलिस कैंप खोले जाएंगे। पहले से 22 कैंप हैं। पहले चरण में 780 और दूसरे चरण के लिए 751 गांवों का चयन किया गया है।

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13 इलाकों में खुलेंगे 30 नए पुलिस कैंप। सांकेतिक तस्वीर।

देश के नक्सल प्रभावित राज्यों से नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसके लिए एक व्यापक नीति है, जो अब तक काफी सफल भी रही है। पिछले 5 सालों में नक्सलवाद के खिलाफ जंग में मिली कामयाबी से सुरक्षाबलों के हौसले बढ़े हुए हैं। लिहाजा, दिन-ब-दिन सुरक्षाबलों का ऑपरेशन सशक्त होता जा रहा है। अपनी मुस्तैदी बढ़ाने के लिए सुरक्षाबल लगातार जुटे हैं। इसकी कड़ी में नक्सल प्रभावित झारखंड में चौकसी बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है।

नक्सलियों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले इलाकों में 30 नए पुलिस कैंप खोले जाएंगे। पहले से 22 कैंप हैं। पहले चरण में 780 और दूसरे चरण के लिए 751 गांवों का चयन किया गया है। इन कैंपों के जरिये ग्रामीणों की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने की कार्रवाई की जानी है। कैंपों के जरिये आसपास के ग्रामीण इलाकों के युवक-युवतियों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए कैंप में ही मैकेनिक, कारपेंटर, ड्राइविंग, मछली पालन, मुर्गी पालन, नर्सिंग व टेलरिंग आदि का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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ये स्पष्ट है कि नक्सलियों से निपटने के लिए सिर्फ बंदूक ही काफी नहीं है। नक्सल प्रभावित इलाकों में शिक्षा, रोजगार और विकास कार्यों की भी बड़ी भूमिका होनी है। खोले जा रहे पुलिस कैंप इन्हीं उद्देश्यों को पूरा करेंगे। इसके लिए करीब सात हजार युवक-युवतियों को सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं से संबद्ध कराने की प्रक्रिया भी चल रही है। जहां पर इंटरनेट की सुविधा पहुंच गई है, वहां के कैंपों में ग्रामीणों को एटीएम की सेवा उपलब्ध करायी जाएगी।

साथ ही, एलईडी और सेटअप बॉक्स के जरिए सरकार की विकास योजनाओं की जानकारी भी ग्रामीणों को मिल सकेगी। इन गांवों में पुलिस कैंप के जरिये गांव के छात्र-छात्राओं को किताब, पोशाक, बैग आदि दिए जा रहे हैं। वहीं, खिलाड़ियों को फुटबॉल, हॉकी, जर्सी दिया जा रहा है। बुजुर्ग पुरुष और महिलाओं के साथ ही गर्भवती माताओं को चिकित्सकीय सेवा उपलब्ध कराने की कार्रवाई भी की जा रही है। इन सबके अलावा दूर-दराज के गांवों में पुलिस के संरक्षण में पुल, पुलिया और सड़क का निर्माण किया जा रहा है। जिससे सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर तरीके से मजबूत किया जा सके।

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