गांव के युवाओं को शहर घूमने का मौका, नक्सल प्रभावित इलाकों में CRPF की अनूठी पहल

सीआरपीएफ (CRPF) गांव से कभी बाहर नहीं निकले नक्सल प्रभावित इलाकों के युवाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से उन्हें भ्रमण पर भेजने का एक अभिनव प्रयास कर रही है। सुदूर प्रदेशों में जा कर वहां की सभ्यता और संस्कृति से वाकिफ़ हो कर ये युवा बाहरी दुनिया से काफी कुछ सीख सकेंगे। अति पिछड़े और नक्सल ग्रस्त गांवों से बाहर निकलकर ये युवा अब उड़ान भरने की तैयारी में हैं और उन्हें पंख लगाने का काम कर रही है सीआरपीएफ (CRPF)।

CRPF

नक्सल इलाकों में विकास और ग्रामीणों को जागरूक कर नक्सलवाद के उन्मूलन में झारखंड के गढ़वा जिले की सीआरपीएफ (CRPF) की 172वीं बटालियन लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में नई पहल करते हुए इलाके के दर्जनों बच्चों को बाहर प्रदेशों में भेजा जा रहा है। जहां ये बच्चे वहां के विकास, बदलाव और सभ्यता संस्कृति से वाकिफ़ होंगें। आपको बता दें कि ये सभी जिले के दुरूह नक्सल प्रभावित भंडरिया और बड़गढ़ क्षेत्र के बच्चे हैं। सबको सवालिया नजरों से देखते ये बच्चे आज पहली बार अपने गांव से निकल बाहर आए हैं। इन्होंने आज तक केवल सुना था कि देश में कहीं पर भुवनेश्वर नाम का शहर है। लेकिन कभी देखा नहीं था। वो आज खुश हैं कि सीआरपीएफ (CRPF) के सहयोग से आज उनके कदम बाहर निकले हैं।

आज वो वहां जा रहे हैं, जहां उन्हें बहुत कुछ देखने और सिखने को मिलेगा। जिसके किस्से वो लौटने के बाद अपने गांव में लोगों को बताएंगे। सुदूर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले ये बच्चे जिन्होंने अब तलक शहर को भी नज़र नहीं किया था, अब वो नगर और महानगर देखेंगे। सीआरपीएफ (CRPF) के प्रयास से नेहरू युवा केन्द्र के तत्वावधान में भुवनेश्वर भेजे जा रहे 30 ग्रामीण बच्चों के साथ में गाइड के रूप में जा रहीं सीआरपीएफ (CRPF) की महिला अधिकारी तूलिका सिन्हा और डॉक्टर तूलिका गर्ग बताती हैं कि बच्चों को पूरा भुवनेश्वर घुमाया जाएगा। इन्हें हर जगह से रूबरू कराते हुए बाहरी परिवेश और रहन सहन से परिचय कराया जाएगा। बता दें कि 30 युवाओं को उड़ीसा के भुवनेश्वर में आयोजित 12 वीं ट्रायवल यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम में भाग लेने के लिए भेजा गया। वहां, 27 दिसंबर 2019 से 2 जनवरी तक आयोजित इस कार्यक्रम में ये युवा भाग लेंगे। 

इस भ्रमण पर जा रहे युवाओं के अंदर जोश और जज़्बे का संचार करते हुए सीआरपीएफ (CRPF) कमांडेंट आशीष कुमार झा ने कहा कि इन बच्चों को उन इलाकों से चयनित किया गया है जो काफी पिछड़ा हुआ और पूरी तरह से नक्सल प्रभावित है। ऐसे गांव के बच्चे जब बाहर से सिख कर आएंगें तो निश्चित रूप से अपने गांव के विकास और बदलाव के वाहक बनने के साथ-साथ लोगों को नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए जागरूक करने में सहायक सिद्ध होंगे। सड़क निर्माण, शौचालय की व्यवस्था, पीने के पानी की उपलब्धता, स्कूल में पुस्तकालय की स्थापना और अब बच्चों को देश के विभिन्न जगहों से परिचित करवाने जैसे पहल के साथ नक्सली उन्मूलन की दिशा में सीआरपीएफ (CRPF) द्वारा किया जा रहा प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है। उम्मीद है कि ऐसी पहल नक्सलियों के समूल नाश का जरिया बने।

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