कल से खुलेंगे जन्नत के दरवाजे, घाटी में पर्यटकों पर लगा बैन हटा

जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में धारा 370 लगने के बाद  से ही केंद्र सरकार ने घाटी में पर्यटकों के आने पर भी पाबंदी लगा दी थी। लेकिन घाटी में सुधरते हालात को देखकर सरकार पर्यटकों पर लगे बैन को हटाने जा रही है। कल से ये प्रतिबंध हटाकर घाटी के दोबारा गुलजार होने की संभावना बढ़ गई है।

Jammu Kashmir

जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में हालात सामान्य करने और अमन बहाली की दिशा में सरकार के इस कदम को अहम माना जा रहा है। लेकिन विपक्षी पार्टियां इस पर कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं। जबकि सरकार के इस फैसले के बाद सुरक्षा बलों के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। पिछले 2 अगस्त को जारी सालाना अमरनाथ यात्रा के बीच सूबे के गृह विभाग की ओर से घाटी में मौजूद सभी प्रकार के पयर्टकों को फौरन वहां से निकल जाने की एडवाइजरी जारी की गई थी। तब इस एडवाइजरी को लेकर, खासतौर पर विपक्ष की ओर से सरकार पर सवाल खड़े किए गए थे। तब शासन की ओर से यह भी कहा गया था कि पवित्र अमरनाथ गुफा मार्ग पर विस्फोटक मिले हैं। आतंकी हमले की आशंका भी जाहिर की गई थी। लेकिन उसके ठीक तीन दिन बाद यानी 5 अगस्त को धारा 370 और 35ए को हटाने का संसद में ऐलान किया गया।

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इस बीच जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में काफी बड़ी तादाद में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की कंपनियां भी भेजी गई। इसी दौरान घाटी में बड़ी संख्या में मुख्यधारा और अलगाववाद से जुड़े छोटे-बड़े नेताओं को हिरासत में लेकर नजरबंद किया गया। इनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख डॉ फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद लोन और नौकरशाही से राजनीति में आए शाह फैजल भी शामिल हैं। अभी कुछ दिन पहले ही शासन की अनुमति मिलने पर जम्मू से नेंशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं का एक बड़ा दल श्रीनगर जाकर पार्टी प्रमुख डॉ फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की थी।

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सूबे में बीडीसी चुनाव होने जा रहे हैं, इसलिए शासन की ओर से नरमी का रुख अख्तियार करते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं को मिलने की इजाजत दी गई। केंद्र की मोदी सरकार से लेकर सूबे का शासन इस कोशिश में निरंतर लगा हुआ है कि घाटी में जल्द से जल्द हालात सामान्य हों। इस दिशा में पिछले दिनों जो भी कदम उठाए गए, उसके बाद अब 10 अक्टूबर से घाटी आने वाले पयर्टकों की आमद पर लगी रोक को हटा देने के फैसले ने दुनिया को भी एक पैगाम दिया है। अब यह उम्मीद जगी है कि तनाव और सन्नाटे में घिरी घाटी पयर्टकों के आने से गुलजार होगी। यहां के वीरान पड़े शिकारे, पहलगाम और गुलमर्ग जैसे प्रमुख पयर्टन स्थल फिर से चहक उठेंगे। हालांकि इस बीच ये भी ध्यान रखने वाली बात है कि पिछले दिनों सरहद पार से भारी संख्या में आतंकियों की घुसपैठ हुई है, उससे सुरक्षा बलों की चुनौतियां भी बढ़ गई हैं।

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