Chhattisgarh: सरेंडर कर चुके नक्सली करना चाहते हैं इलाके का विकास, इस काम में करेंगे प्रशासन की मदद

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के नक्सल प्रभावित (Naxal Area) अरनुपर थाना क्षेत्र के कोंडेरास गांव के रहने वाले आत्मसमर्पित नक्सली (Surrendered Naxals) अब सकारात्मक और विकास का कार्य करना चाहते हैं।

Surrendered Naxals

सांकेतिक तस्वीर।

समर्पित नक्सलियों (Surrendered Naxals) का कहना है कि वे नहीं चाहते कि उनके बच्चे भी उनकी तरह अशिक्षित रहें। वे चाहते हैं कि गांव में स्कूल बनें, ताकि उनके बच्चे पढ़-लिखकर अच्छा इंसान बन सकें।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के नक्सल प्रभावित (Naxal Area) अरनुपर थाना क्षेत्र के कोंडेरास गांव के रहने वाले आत्मसमर्पित नक्सली (Surrendered Naxals) अब सकारात्मक और विकास का कार्य करना चाहते हैं। वे अपने बच्चों को शिक्षित करना चाहते हैं। वे अपने परिवार को स्वस्थ और खुशहाल देखना चाहते हैं।

इलाके में नक्सलियों (Naxalites) द्वारा तोड़े गए स्कूलों और सड़कों को दुरूस्त करने और दोबारा से बनाने में प्रशासन की मदद करने का संकल्प भी लिया है। एसपी ने इनकी इस नेक मंशा को देखते हुए जिला प्रशासन से इलाके के सड़क, स्कूल, आश्रम निर्माण कार्य में इन्हें जोड़ने करने की सिफारिश की है।

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ग्रामीणों और समर्पित नक्सलियों (Surrendered Naxals) का कहना है कि वे नहीं चाहते कि उनके बच्चे भी उनकी तरह अशिक्षित रहें। वे चाहते हैं कि गांव में स्कूल बनें, ताकि उनके बच्चे पढ़-लिखकर अच्छा इंसान बन सकें। बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए हॉस्पिटल बनें। सरकारी योजनाओं को आसानी से गांवों तक पहुंचाने के लिए सड़कें बनें।

इसलिए वे नक्सलियों के चंगुल से निकलकर पुलिस के संरक्षण में आए हैं और मुख्याधारा से जुड़े हैं। वे अब दोबारा ऐसी गलती करना नहीं चाहते। सरेंडर किए हुए नक्सलियों (Naxals) ने मलांगिर पुल और सड़क निर्माण में सुरक्षा देने की बात भी कही है। बता दें कि पहले गांव के आसपास पुलिस कैंप खुलने पर गांव वाले उसका विरोध करते थे। लेकिन अब ग्रामीण खुद गांव में फोर्स लाने और कैंप शुरू करने की मांग कर रहे हैं।

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3 नवंबर को आत्मसमर्पित नक्सलियों (Surrendered Naxals) और गांव से आए जनप्रतिनिधियों ने मीडिया के सामने भी यह बात कही। उनका कहना है कि नक्सलियों के दबाव में आकर वे सड़क और पुल-पुलिया तोड़ते हैं, जिसका खामियाजा पूरा समाज भुगत रहा है। जब गांव में फोर्स और कैंप होंगे तो नक्सली नहीं आएंगे और हम सुरक्षति रहेंगे। बच्चे भी अच्छे से पढ़ाई कर भला इंसान बनेंगे।

इस मौके पर गोंडेरास के 10 नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करने वाले गांव के सरपंच और उप सरपंच को कार्यक्रम में एसपी और अन्य पुलिस अधिकारियों ने सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि हर गांव के लोग ऐसे जागरूक होंगे तो नक्सलवाद खत्म होने में समय नहीं लगेगा।

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इस दौरान गांव का गायता उर्फ माटी पुजारी भी मौजूद था। उसने बताया कि वह नक्सलियों से काफी प्रताड़ित है, न चाहते हुए भी उनका साथ देना मजबूरी हो जाती है। यदि गांव में कैंप खुलता है तो शांति बनी रहेगा। साथ ही विकास कार्यों में तेजी आएगी। अभी राशन लेने कई किमी पैदल चलना होता है। बीमार होने पर एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती है। पर, सड़क बन जाने से यह मुश्किल आसान हो जाएगी।

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