छत्तीसगढ़: हिंसा का रास्ता छोड़कर अब खेती करेगा नक्सलियों का ये समूह, प्रशासन ने दिया नया ट्रैक्टर

8 जुलाई को सरेंडर करने के बाद 2 लाख के इनामी नक्सली प्रकाश करताम उर्फ पांडू ने मांग की थी कि उसे ट्रैक्टर दिया जाए , जिसके बाद जिला प्रशासन ने इसका इंतजाम किया.

Jharkhand

सांकेतिक तस्वीर।

छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा(Dantewada) नक्सली प्रभावित क्षेत्र है। लेकिन यहां के जिला प्रशासन ने नक्सलियों को सुधारने के लिए एक नई मुहिम शुरू की है, जिसके तहत अब नक्सली (Naxal) खेती करेंगे और लोगों का खून नहीं बहाएंगे।

ये कदम नक्सलियों (Naxalites) को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उठाया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दंतेवाड़ा के कलेक्टर दीपक सोनी ने 10 सरेंडर नक्सलियों के समूह को नए ट्रैक्टर की चाबी सौंपकर एक नई पहल की शुरुआत की है।

दंतेवाड़ा ऐसा पहला जिला है, जहां इस तरह का प्रयास किया गया है। अब यहां सरेंडर कर चुके नक्सलियों का समूह खेती करेगा। खास बात ये है कि सरेंडर करने वाले नक्सली खेती करने के साथ ही ट्रैक्टर भी किराए पर देंगे। ऐसा करने से इन नक्सलियों को आय होगी।

दरअसल 8 जुलाई को सरेंडर करने के बाद 2 लाख के इनामी नक्सली प्रकाश करताम उर्फ पांडू ने मांग की थी कि उसे ट्रैक्टर दिया जाए , जिसके बाद जिला प्रशासन ने इसका इंतजाम किया। पांडू ने पत्नी के साथ सरेंडर किया था।

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ट्रैक्टर मिलने के बाद कई नक्सली बेहद खुश दिखे और अपनी आजीविका के लिए निश्चिंत दिखाई दिए. एक नक्सली ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अब मैं खेती करूंगा। नक्सलवाद में सिवाय दर्द और हिंसा के कुछ नहीं रखा है।

इस दौरान कई अधिकारियों ने ये दावा किया कि ग्रुप बनाकर ट्रैक्टर उपलब्ध कराने वाला दंतेवाड़ा पहला जिला है। इसके अलावा खबर ये भी है कि चिकपाल और पोटाली इलाके में सरेंडर करने वाले नक्सलियों का भी ग्रुप बनाया जाएगा और उन्हें भी 15 अगस्त को ट्रैक्टर दिया जाएगा।

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