बिहार: मुंगेर के युवा अब नहीं फंसेंगे नक्सलियों की जाल में, लेंगे रोजगार का प्रशिक्षण

गरीबी और बेरोजगारी की वजह से पूर्व बिहार के जमुई, मुंगेर, लखीसराय और बांका के युवा आसानी से नक्सलियों के बहकावे में आ जाते हैं। यही वजह है कि इन इलाकों में नक्सलियों को अपनी जड़ मजबूत करने का मौका मिला।

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मुंगेर के युवा अब नहीं फंसेंगे नक्सलियों की जाल में।

गरीबी और बेरोजगारी की वजह से पूर्व बिहार के जमुई, मुंगेर, लखीसराय और बांका के युवा आसानी से नक्सलियों के बहकावे में आ जाते हैं। यही वजह है कि इन इलाकों में नक्सलियों को अपनी जड़ मजबूत करने का मौका मिला। यहां नक्‍सली (Naxal) खुलेआम भर्ती अभियान भी चलाते रहे हैं। हाल ही में जमुई के पहाड़ी क्षेत्र के गांवों में नक्सलियों ने ढोल पीटकर हर घर से एक युवा को संगठन में शामिल होने का न्योता दिया था।

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सांकेतिक तस्वीर।

संगठन से जुडऩे वाले युवाओं को नक्सली (Naxal) छोटी-मोटी रकम भी देते हैं। लोभ में आकर कई बेरोजगार युवा नक्सली संगठन से जुड़ जाते हैं। लेकिन नक्‍सल प्रभावित मुंगेर के युवा अब लाल आतंक की जाल में नहीं फंसेंगे। नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले मुंगेर के हवेली खड़गपुर प्रखंड में पांच करोड़ की लागत से जल्द ही बिहार का दूसरा चालक प्रशिक्षण केंद्र खोला जाएगा। इसके लिए तीन एकड़ भूमि का चयन किया गया है। प्रशिक्षण केंद्र के लिए राज्य सरकार से पांच करोड़ रुपये की मांग की गई है। इस प्रशिक्षण केंद्र के खुलने से इलाके के बेरोजगारों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इस नक्‍सल (Naxal) प्रभावित इलाके में चालक प्रशिक्षण केंद्र खुलने के बाद युवाओं को रोजगर का अवसर मिलेगा।

इसके बाद ऐसे युवा नक्‍सली (Naxal) संगठन के बदले समाज की मुख्‍य धारा से जुड़ेंगे और नक्सली संगठन कमजोर पड़ेगा। मुंगेर के जिला परिवहन पदाधिकारी ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर यह जानकारी दी है कि प्रशिक्षण केंद्र के लिए तीन एकड़ भूमि का चयन कर लिया गया है। विभिन्न तरह के कार्यों के लिए लगभग पांच करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। राशि जल्द उपलब्ध करा दी जाए तो नए वर्ष में यहां प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया जा सकता है। गौरतलब है कि सूबे का पहला चालक प्रशिक्षण केंद्र औरंगाबाद में खोला गया है। बता दें कि औरंगाबाद भी नक्सल (Naxal) प्रभावित इलाका है। वहां प्रशिक्षणार्थियों के लिए मुफ्त भोजन और आवास की सुविधा भी मुहैया कराई जाती है।

प्रशिक्षण केंद्र में गाड़ी चलाने के अलावा विभिन्न प्रकार के वाहनों में लगे इंजन को ठीक करने की भी जानकारी दी जाती है। ऐसी ही व्‍यवस्‍था मुंगेर के प्रशिक्षण केंद्र में भी की जाएगी। उल्लेखनीय है कि इसके पहले हवेली खड़गपुर में बीआइटी मेसरा (रांची) द्वारा ग्रामीण युवाओं के लिए प्रशिक्षण केंद्र खोला गया था। हालांकि, कुछ ही साल बाद इसे बंद कर दिया गया। वहां उद्योग विभाग द्वारा युवाओं को चांदी की मछलियां तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाता था। प्रशिक्षण प्राप्त कई कारीगरों ने दूसरे प्रदेशों में जाकर काम किया।

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