भारत-चीन के बीच नया नहीं है तनाव, जानें इस विवाद का इतिहास

भारत और चीन (India-China) के रिश्ते में एक बार फिर तनाव है। दोनों देशों के बीच यह तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया, जब जून के महीने में गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुए हिंसक संघर्ष में 20 भारतीय सैनिकों की मौत हो गई।

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फाइल फोटो।

भारत और चीन (India-China) की सीमाएं जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से लगी हुई है, जिनकी लंबाई 3,488 किलोमीटर है।

भारत और चीन (India-China) के रिश्ते में एक बार फिर तनाव है। दोनों देशों के बीच यह तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया, जब जून के महीने में गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुए हिंसक संघर्ष में 20 भारतीय सैनिकों की मौत हो गई। लेकिन भारत और चीन के बीच सालों से चले आ रहे इस तनाव की जड़ इतिहास में है।

दरअसल, 1949 में माओ ने कम्युनिस्टों की जीत से पहले अंतरराष्ट्रीय संधियों को एकतरफा होने का आरोप लगाते हुए इसे खारिज कर दिया। भारत, चीन के साथ लगी सीमा की ऐतिहासिकता को आधार बनाते हुए सही बता रहा था। वहीं, चीन युद्ध की तैयारी कर रहा था। माओ ने ‘मैकमोहन रेखा’ को औपनिवेशिक बताते हुए इसे मानने से इनकार कर दिया।

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भारत की आजादी के दो साल बाद माओ ने 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) का गठन किया था। भारत ने एक अप्रैल 1950 को पीआरसी को मान्यता दी और इसके साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए। चीन की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाने वाला भारत पहला गैर-कम्युनिस्ट देश था।  

इतना ही नहीं, साल 1954 में भारत ने तिब्बत पर चीन की दावेदारी को स्वीकार कर लिया और मान लिया कि तिब्बत चीन का हिस्सा है। इस दौर में हिन्दी-चीनी, भाई-भाई का नारा भी बहुत जोरशोर से लगा। दरअसल, चीन ने 1950 में तिब्बत पर हमला कर उसे अपने कब्जे में ले लिया। 

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चीन के नियंत्रण के बाद साल 1959 में तिब्बती आध्यात्मिक प्रमुख दलाई लामा ने कई अन्य शरणार्थियों सहित भारत से शरण मांगी और हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में बस गए। इसके बाद चीन ने भारत पर तिब्बत और पूरे हिमालयी क्षेत्र में विस्तारवाद और साम्राज्यवाद के फैलाने का आरोप मढ़ दिया।

कहा जाता है कि दोनों देशों के बीच विवाद की शुरुआत यहीं से हुई। चीन के पहले प्रधानमंत्री चाउ एन लाई ने जून 1954 से जनवरी 1957 के बीच चार बार भारत का दौरा किया। भारतीय प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी अक्तूबर 1954 में चीन के दौर पर गए। तब दोनों देशों के बीच पंचशील समझौता हुआ। इसके बावजूद चीन ने 1962 में भारत पर हमला कर दिया।

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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ साल 2013 में हुए समझौते और नेहरू के साथ 1954 के पंचशील समझौते सहित भारत और चीन के बीच सात प्रमुख समझौते हो चुके हैं। मौजूदा सरकार ने भी चीन के साथ संबंध बेहतर करने के लिए काफी प्रयास किए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी-जिनपिंग पिछले छह वर्षों के दौरान 18 बार मुलाकात कर चुके हैं।इन दोनों की पहली मुलाकात 2014 में ब्राजील में हुई थी, जिसमें सीमा विवाद सुलझाने को लेकर सहमति बनी थी। लेकिन वर्तमान में दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है।

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भारत और चीन (India-China) की सीमाएं जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से लगी हुई है, जिनकी लंबाई 3,488 किलोमीटर है। इन्हीं राज्यों और उसके आस-पास के कई इलाकों को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (लाईन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी) एक तरह का सीमांकन है।

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यह भारत के अधिकार वाले इलाके और चीन के नियंत्रण वाले हिस्से को एक दूसरे से अलग करती है। भारत के मुताबिक एलएसी की लंबाई 3,488 किलोमीटर है। जबकि चीन एलएसी को सिर्फ 2,000 किलोमीटर लंबी मानता है। एलएसी पर कई ग्लेशियर, बर्फ के रेगिस्तान, पहाड़ और नदियां पड़ती हैं। चीन के साथ गलवान घाटी, पैंगोंग त्सो झील, डेप्सांग, डोकलम और तवांग को लेकर भारत का विवाद है।

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