UNSC में पाकिस्तान पस्त, कश्मीर मुद्दे पर नहीं मिला किसी का साथ

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को एक बार फिर मात खानी पड़ी। 15 जनवरी को UNSC में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के सिर्फ चीन का साथ मिला।

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को एक बार फिर मात खानी पड़ी।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को एक बार फिर मात खानी पड़ी। 15 जनवरी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर मुद्दे (Kashmir Issue) पर पाकिस्तान को सिर्फ चीन (China) का साथ मिला। रूस समेत कई सदस्यों ने UNSC की बैठक में कहा कि कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान (Pakistan) का द्विपक्षीय मुद्दा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को एक बार फिर मात खानी पड़ी। 15 जनवरी को UNSC में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के सिर्फ चीन का साथ मिला। रूस समेत कई सदस्यों ने UNSC की बैठक में कहा कि कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा है।

रूस ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि मतभेद को 1972 के शिमला समझौते और 1999 के लाहौर घोषणा के आधार पर द्विपक्षीय प्रयासों के माध्यम से सुलझाया जाएगा।’ दरअसल, हर बार मुंह की खाने के बावजूद पाकिस्तान ने चीन के सहारे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एओबी (एनी अदर बिजनेस) के तहत कश्मीर मसले पर क्लोज डोर मीटिंग का प्रस्ताव रखा था।

चीन ने UNSC में इस मुद्दे पर अपील रखा था, जिसके लिए 24 दिसंबर, 2019 की तारीख तय की गई थी। लेकिन तब यह मीटिंग नहीं हो पाई थी। जिसके बाद चीन ने यह मामला 15 जनवरी को हुई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मीटिंग के दौरान उठाया।

इस मामले पर पाकिस्तान और चीन को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन और रूस का साथ नहीं मिला। रूस की तरफ से द्विपक्षीय स्तर पर मामला सुझलाने का सुझाव दमित्री पोलिंस्की ने दिया है।

पोलिंस्की UNSC में रूस के पहले स्थायी प्रतिनिधि हैं। फ्रांस ने कश्मीर को भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा बताते हुए इस पर चर्चा का विरोध किया। इसमें फ्रांस का कहना है कि यह मुद्दा भारत और पाकिस्तान की ओर से द्विपक्षीय रूप से सुलझाया जाना चाहिए।

यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा, ‘एक बार फिर हमने देखा कि एक सदस्य ने यह मुद्दा उठाने की कोशिश की, जिसे अन्य किसी का समर्थन नहीं मिला। हमें खुशी है कि इस मामले में पाकिस्तानी के किसी अनर्गल आरोप को सुरक्षा परिषद ने चर्चा योग्य नहीं पाया।’ 

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इससे पहले विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि वे UNSC के घटनाक्रम की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और अगर चीन, कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा चलाता है तो इससे निपटने के लिए वे तैयार हैं।

बता दें कि चीन ने इस मुद्दे पर पहले भी UNSC की बैठक बुलाई थी। हालांकि तब भी चीन और पाकिस्तान को इससे कुछ भी हासिल नहीं हुआ था और सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने इसे भारत का आंतरिक मुद्दा बताते हुए कार्रवाई से इनकार कर दिया था।

 

 

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