खुफिया एजेंसियों का खुलासा, भारत में घुसपैठ करने की कोशिश में जैश के आतंकी

आंतकी संगठन सियालकोट-शकरगढ़ और भिम्बर-समानी सेक्टरों के जरिए भारत में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं। इन सेक्टरों से पहले भी आतंकियों (Terrorists) ने घुसपैठ किया है। 

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सांकेतिक तस्वीर।

जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) आने वाले महीनों में भारत में आतंकियों (Terrorists) को भेजने के लिए इन दोनों सेक्टरों का इस्तेमाल कर सकता है।

खुफिया एजेंसियों ने भारत को निशाना बनाने वाले आतंकी संगठनों (Terrorist Organizations) को लेकर बड़ा खुलासा किया है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, आंतकी संगठन सियालकोट-शकरगढ़ और भिम्बर-समानी सेक्टरों के जरिए भारत में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं। इन सेक्टरों से पहले भी आतंकियों (Terrorists) ने घुसपैठ किया है। 

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा तैयार किए गए एक डोजियर के मुताबिक, इन सेक्टरों के जरिए भारत में घुसे आतंकियों ने नवंबर, 2016 में नगरोटा आर्मी कैंप, फरवरी, 2018 में सुजवान और सितंबर, 2018 में झज्जर कोटली और नगरोटा टोल प्लाजा को अपना निशाना बनाया था। इस दौरान आतंकी शकरगढ़ के बीन नुल्लाह इलाके के रास्ते जम्मू-कश्मीर में घुसे थे। 

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डोजियर में इस बात को रेखांकित किया गया कि साल 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले को समन्वित करने वाले काशिफ जान, इरफान झांगवी और शाहिद लतीफ शकरगढ़ के देहरा और सरजाल से भारत में आतंकवादियों को लॉन्च करने में सक्रिय रूप से शामिल हैं। जैश के कई आतंकियों (Terrorists) ने इस रास्ते भारत में घुसपैठ की है।

इसमें जैश के मुखिया मसूद अजहर के बेटे उमर और उस्मान भी शामिल हैं। इसके अलावा साल 1999 के आईसी-814 हाईजैकिंग में शामिल मुख्य आरोपी और मसूद अजहर का बड़ा भाई अजहर इब्राहिम, मुफ्ती रऊफ असगर, मोहम्मद इस्माइल और बालाकोट कैंप में विस्फोटक प्रशिक्षक रशीद गाजी जैसे हाई प्रोफाइल आतंकवादियों (Terrorists) ने साल 2018 में भारत में घुसपैठ की।

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जनवरी में जैश कमांडर अजहर इब्राहिम और मसूद अजहर के बेटे अब्दुल्ला की सियालकोट सेक्टर में लॉन्च पैड पर आतंकी संगठनों की गतिविधियों की निगरानी करने और फरवरी से वहां जैश आतंकी कैडर के नियमित आवाजाही की सूचना मिली। 

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) आने वाले महीनों में भारत में आतंकियों (Terrorists) को भेजने के लिए इन दोनों सेक्टरों का इस्तेमाल कर सकता है। इसके लिए वह इस इलाके में सक्रिय आतंकी संगठन हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी के नेटवर्क की मदद ले सकता है। इन आतंकी संगठनों (Terrorist Organizations का मंसूबा जम्मू और दक्षिण कश्मीर में हमले करने का है।

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