कोरोना वायरस की ‘सुपर स्प्रेडर’ बनी तब्लीगी जमात, साबित हो रहा मौत का मरकज़

तब्लीगी जमात की बैठक के बाद मलेशिया में करीब 620 से ज्यादा लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। स्थिति गंभीर होते देख मलेशिया को अपने बॉर्डर सील करने पड़े।

Tablighi Jamaat

तब्लीगी जमात के मरकज को सील किया गया।

Corona Virus (Covid-19) की चपेट में आए लोगों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। चीन के वुहान से निकलकर इटली, ईरान से होते हुए इसका एपिसेंटर अब अमेरिका बन चुका है। दुनियाभर में करीब 44 हजार लोगों की इस महामारी के चलते मौत हो चुकी है। करीब 9 लाख लोग बीमार हैं। आशंका है कि इस महामारी से मरने वालों की संख्या लाखों में पहुंच सकती है। भारत की बात करें तो अब तक करीब 1900 लोगों में कोरोना वायरस पॉजिटिव पाया जा चुका है। 54 जानें जा चुकी हैं। और ये सब तब जब पूरा देश हफ्ते भर से ज्यादा समय से लॉकडाउन है।

इस बीमारी की खासियत ये है कि स्प्रेडर कौन है किसी को पता नहीं चलता। जब तक पता चलता है, इसका मरीज कई लोगों तक बीमारी को पहुंचा चुका होता है। और फिर ये चेन बनती चली जाती है। लॉकडाउन का मकसद भी यही है कि इस चेन को तोड़ा जाए, ताकि इस महामारी पर रोक लग सके। लेकिन रोकथाम के अभियान से इतर एक और अभियान चल रहा है, जाने-अनजाने इस महामारी को फैलाने का अभियान। अब तक के आंकड़ों और नतीजों को देखें तो ये साबित होता जा रहा है कि कोरोना का नया सुपर स्प्रेडर तब्लीगी जमात है। आइए समझते हैं।

कहानी शुरू होती है फरवरी 2020 से। तब्लीगी जमात (Tablighi Jamaat) ने फरवरी के महीने में मलेशिया में एक बैठक आयोजित की थी। इसका कुल हासिल तो नहीं पता, लेकिन 3 मार्च को ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, यह जमात के साउथईस्ट एशिया में कोरोना वायरस (Covid-19) फैलने का बड़ा कारण बना। चार दिनों तक चली इस जमात के बाद मलेशिया में करीब 620 से ज्यादा लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। स्थिति गंभीर होते देख मलेशिया को अपने बॉर्डर सील करने पड़े। ध्यान रहे तब तक कोरोना वायरस की वजह से भारत में यात्रा प्रतिबंध नहीं लगे थे।

जब मलेशिया ने अपने बॉर्डर सील कर दिए तब ब्रूनेई में कोरोना के 73 केस मिले जबकि थाईलैंड में 10 केस पाए गए। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वायरस की वजह से हुई 3 मौतें भी इस मीटिंग से जुड़ी हुई थीं। महीना बदला, जगह बदली। महीना मार्च, जगह दिल्ली का निजामुद्दीन। तब्लीगी जमात के मरकज में दो हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ जुटी। इनमें से तमाम वो लोग थे जो मलेशिया की बैठक में भी शामिल हुए थे। इसमें भारत के अलग-अलग राज्यों के अलावा कई दूसरे देशों के लोग भी शामिल थे। 13 से 15 मार्च तक चली इस बैठक के बाद मरकज के कई सदस्यों में Kovid-19 पॉजिटिव पाया गया।

13 मार्च यानी वह तारीख जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से कोरोना को लेकर इमरजेंसी घोषित नहीं की गई थी। पर उसी 13 मार्च को दिल्ली सरकार ने एक नोटिस जारी कर साफ कर दिया था कि कहीं भी दो सौ से अधिक लोग एक साथ जमा नहीं हो सकते। फिर भी मरकज में हजारों की भीड़ जमा हुई और अगले कई दिनों तक जमी रही। अब जब मरकज से कोरोना के मामले सामने आने लगे तो दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने ना सिर्फ मरकज बल्कि पूरे इलाके को सील कर दिया है। पर जैसा कि हमने ऊपर बताया, स्प्रेडर अपना काम कर चुके थे।

अब जरा आंकड़ों पर नजर डालते हैं। इस मीटिंग में हिस्सा लेने वाले 10 लोगों की मौत बीमारी की वजह से हो चुकी है। सिर्फ तेलंगाना में ही 6 लोगों की मौत हुई है। इस सम्मेलन में शामिल 24 लोग पॉजीटिव पाए गए हैं। कई राज्य अब उन सभी लोगों की तलाश कर रहे हैं जो इस सम्मेलन में शामिल हुए थे।

तब्लीग जमात से ताल्लुक रखने वाले 78 लोगों को कर्नाटक में क्वारंटीन में रखा गया है। 300 ऐसे लोगों की तलाश की जा रही है जो दिल्ली गए थे। इसके अलावा पुद्दुचेरी में 3 लोगों को आइसोलेशन में रखा गया है। तेलंगाना-महाराष्ट्र के बॉर्डर पर प्रशासन ने 32 ऐसे यात्रियों को रोका जो एक लॉरी में सवार होकर आ रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन सभी लोगों ने मीटिंग में शामिल होने के बाद अजमेर का दौरा किया था।

तेलंगाना पुलिस निजामुद्दीन से लौटने वालों की सरगर्मी से तलाश कर रही है। रयालसीमा में 70 लोगों को क्वारनटीन में रखा गया है जबकि 40 लोगों को विशाखापट्टनम स्थित आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है।

पुणे में ऐसे 182 लोगों की पहचान की जा चुकी है, जो दिल्ली के निजामुद्दीन में जमात में शामिल थे। केरल के कम से कम 25 लोग इस जमात में शामिल हुए थे। जिनमें से 10 वापस लौटे हैं, उन्हें राज्य सरकार ने क्वारंटीन में रखा है। उधर, तमिलनाडु के करीब 1500 लोग इस जमात में शामिल हुए थे। इनमें से जितने लोगों की पहचान हुई है, उनसे में अब तक 110 लोगों में कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। महाराष्ट्र के नागपुर में 72 ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जो निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात में शामिल हुए थे। इन सभी को आइसोलेशन में रखा गया है। वहीं, गुजरात के 72 लोग तब्लीगी जमात में शामिल हुए थे। इनमें से 34 लोग अहमदाबाद से, 20 लोग भावगनर से और 12 लोग मेहसाणा से थे। इनमें से भावनगर के रहने वाले एक शख्स की कोरोना के चलते मौत हो चुकी है, जबकि बाकी 71 को क्वारंटीन में रखा गया है।

उधर, जम्मू कश्मीर में कोरोना वायरस से हुई पहली मौत उस शख्स की थी, जो मरकज में शामिल हुआ था। श्रीनगर के रहने वाले इस कारोबारी ने हवाई जहाज, ट्रेन और बस से सफर किया था। वो दिल्ली, उत्तर प्रदेश और वापस जम्मू गया था। आशंका इस बात की है कि इस स्प्रेडर ने ना जाने और कितने लोगों को संक्रमित किया होगा। खास ये है कि जम्मू कश्मीर से अब तक सामने आए 80 फीसदी मामलों में, संक्रमित शख्स उस कारोबारी के संपर्क में आए थे। वहीं तेलंगाना में अब तक सामने आए करीब 50 फीसदी मामलों में मरकज़ से कनेक्शन है।

इस बीच गृह मंत्रालय ने जमात में शामिल हुए इंडोनेशिया के करीब 800 लोगों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। और सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि इन लोगों की पहचान की जाए। उसके बाद इन सबके टेस्ट करके उन्हें क्वारंटीन किया जाए। यानी, फरवरी से अब तक तब्लीगी जमात (Tablighi Jamaat) से जुड़े लोगों ने हजारों लोगों तक कोरोना का संक्रमण फैला दिया है।

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