शहादत का अपमान कर रही बीमा कंपनी, मुआवजे की रकम के लिए 4 साल से शहीद का परिवार लगा रहा चक्कर

नक्सलियों से मुठभेड़ में शहीद हुए CRPF के डिप्टी कमांडेंट हीरा कुमार झा को राष्ट्रपति ने मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया, लेकिन उनका परिवार 4 साल से मुआवजे की रकम के लिए बीमा कंपनी के चक्कर लगा रहा है।

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CRPF के शहीद डिप्टी कमांडेंट हीरा कुमार झा की प्रतिमा।

बीमा आग्रह की विषयवस्तु है- लेकिन सिर्फ खरीदते वक्त। क्लेम लेने के वक्त ये दुराग्रह का सबब बन जाता है। बीमा लेते वक्त जितने सब्ज-बाग दिखाए जाते हैं, क्लेम सेटल करवाने के लिए उसी अनुपात में खून के आंसू बहाने पड़ते हैं। खून के ऐसे ही आंसू रो रहा है CRPF के एक शहीद जवान का परिवार। ये परिवार 4 साल से बीमा कंपनी के चक्कर लगा रहा है। हर चक्कर पूरा होने के बाद हिस्से आ जाता है, एक बहाना।

CRPF के इस शहीद जवान का नाम है हीरा कुमार झा, जो शहादत के वक्त डिप्टी कमांडेंट थे। जुलाई, 2014 में बिहार के जमुई में नक्सलियों से मुठभेड़ में ये शहीद हुए थे। इनकी वीरता और शौर्य के लिए 2016 में इन्हें राष्ट्रपति द्वारा मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। इनके गुजरने के बाद इनकी पत्नी बीनू झा को बीमा कंपनी से मुआवजे के 10 लाख मिलने थे लेकिन आज 4 साल बाद भी मिल पाया है तो सिर्फ बहाना।

शहीद के परिवार की हालत देखकर सीआरपीएफ के कई बड़े अधिकारियों ने भी मामले में दखल दी। वे अपने स्तर पर लगातार बीमा कंपनी के साथ बात कर रहे हैं, मामला राज्य सरकार के पास भी पहुंचा लेकिन हासिल सिफर है। अब आलम ये है कि देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले इस जांबाज के परिवार को बीमा की रकम दिलाने के लिए सीआरपीएफ को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।

अब बहाना सुन लीजिए

बीमा कंपनी की दलील है कि डिप्टी कमांडेट हीरा कुमार झा जिस इलाके में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए थे, वह कंपनी के रिकॉर्ड में नक्सल प्रभावित क्षेत्र नहीं है। अगली दलील, शहीद जवान झारखंड राज्य से बीमा के लिए नामित थे, लेकिन वह बिहार राज्य में मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए, इसलिए कंपनी नियम व शर्तों के अनुसार शहीद के परिवार को क्लेम नहीं दे सकती है।

शहादत की कहानी

शहादत के वक्त डिप्टी कमांडेंट हीरा कुमार अपनी बटालियन के साथ झारखंड में तैनात थे। उन्हें पुख्ता सूचना मिली थी कि झारखंड-बिहार सीमा पर नक्सलियों का एक बड़ा ग्रुप मौजूद है। लिहाजा, वह अपने जवानों के साथ नक्सलियों की तलाश में निकल गए। नक्सलियों का पीछा करते हुए ये झारखंड राज्य की सीमा पार कर बिहार के जमुई इलाके में पहुंच गए। 4 जुलाई की सुबह सीआरपीएफ की नक्सलियों से जबरदस्त मुठभेड़ हो गई। दोनों तरफ से अंधाधुंध हुई फायरिंग में कई नक्सली मारे गए और सीआरपीएफ ने उनसे भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद कर लिया। इसी मुठभेड़ में डिप्टी कमांडेंट हीरा कुमार झा शहीद हो गए।

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