UNSC में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन और पाकिस्तान को सुनाई खरी-खोटी, आतंकवाद को लेकर कही ये बात

विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) ने यूएनएससी (United Nations Security Council) में 1 जनवरी, 2021 को दो साल के लिए भारत की सदस्यता ग्रहण करने के बाद पहली बार यूएन (UN) को संबोधित किया।

S Jaishankar

विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S Jaishankar) II फाइल फोटो।

विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) ने कहा कि किसी कारण के बिना आतंकवादी सूची को बाधित करने और रोकने की प्रथा समाप्त होनी चाहिए।

विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) ने यूएनएससी (United Nations Security Council) में 1 जनवरी, 2021 को दो साल के लिए भारत की सदस्यता ग्रहण करने के बाद पहली बार यूएन (UN) को संबोधित किया। अपने पहले संबोधन में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया से आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाने को कहा है और निर्णायक कार्रवाई का आह्वान किया है।

अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा को आतंकवादी कार्रवाइयों से खतरे पर सुरक्षा परिषद में 12 जनवरी को आयोजित बहस में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हिस्सा लिया। यूएन में अपने संबोधन के दौरान जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की जरूरत है। एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council) में संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के लिए आतंकवाद के खतरे को संबोधित करने और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए आठ सूत्रीय एजेंडा दिया।

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उन्होंने बीते कुछ बरसों में आतंकी गुटों, लोन वुल्फ हमलावरों के ड्रोन तकनीक, एकन्क्रिप्टेड संचार व वर्चुअल करेंसी जैसे साधनों तक पहुंच का हवाला दिया। उन्होंने ये भी बताया सोशल मीडिया नेटवर्क की मदद से कट्टरपंथी विचारधारा और युवाओं को जोड़ने की हरकतें भी बढ़ी हैं। कोविड-19 महामारी ने हालात को और मुश्किल ही बनाया है। ऐसे में आतंकवादियों की आर्थिक मदद बंद करना, उनके संसाधन कम करना आतंकी घटनाओं की रोकथाम के अहम उपाय हैं।

विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद की चुनौती के खिलाफ सबसे पहले सभी देशों को उचित राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखानी होगी। जिससे न तो आतंकियों का कोई बचाव हो और न ही उनका कहीं महिमामंडन। बैठक में भारत ने साफ किया कि आतंकवाद के खिलाफ दोहरा रवैया नहीं रखा जा सकता। आतंकियों की मदद करने वाले भी बराबर के दोषी हैं।

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विदेश मंत्री जयशंकर (S Jaishankar) ने कहा कि किसी कारण के बिना आतंकवादी सूची को बाधित करने और रोकने की प्रथा समाप्त होनी चाहिए। साथ ही यह भी जरूरी है कि व्यक्तियों के नाम प्रतिबंधित सूची में डालने या हटाने की प्रक्रिया तार्किक आधार पर हो न कि धार्मिक या राजनीतिक कारणों पर। गौरतलब है कि चीन ने मसूद अजहर को 10 साल के लिए अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध करने की राह में रोड़ा अटकाया था।

विदेश मंत्री ने आठ बिंदुओं वाली कार्ययोजना में बताया कि आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के बीच संबंधों को पूरी तरह से मान्यता दी जानी चाहिए और सख्ती से मुकाबला करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में, हमने 1993 के बम विस्फोट के लिए जिम्मेदार सिंडीकेट को देखा है।

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पाकिस्तान की ओर संकेत करते हुए जयशंकर (S Jaishankar) ने कहा कि धमाकों के जिम्मेदार लोगों को पनाह दी गई और उन्हें कुछ देशों ने फाइव स्टार आतिथ्य प्रदान किया। सुरक्षा परिषद से कहा कि 1993 के मुंबई बम विस्फोटों के लिए जिम्मेदार आपराधिक गिरोहों को न केवल सरकार का संरक्षण ही नहीं मिल रहा बल्कि वे पांच सितारा आतिथ्य का आनंद उठा रहे हैं।

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