राफेल विमान को भारत लाने वाले इन 5 पायलटों के बारे में कितना जानते हैं आप?

राफेल विमान 7000 किलोमीटर का सफर तय कर बुधवार को हरियाणा के अंबाला एयरबेस पर पहुंचे।

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राफेल (Rafale) को लाने के लिए भारतीय वायु सेना के बेस्ट पायलट चुने गए थे। 27 जुलाई को इन पायलटों ने फ्रांसीसी शहर बोडरे में मेरिनैक एयर बेस से उड़ान भरी थी।

राफेल (Rafale) को लेकर भारत में काफी लंबे वक्त से चर्चाएं चल रही थीं। इन्हीं चर्चाओं के बीच 29 जुलाई को 5 राफेल भारत आए। राफेल (Rafale) को लाने के लिए भारतीय वायु सेना के बेस्ट पायलट चुने गए थे। 27 जुलाई को इन पायलटों ने फ्रांसीसी शहर बोडरे में मेरिनैक एयर बेस से उड़ान भरी थी।

राफेल विमान 7000 किलोमीटर का सफर तय कर बुधवार को हरियाणा के अंबाला एयरबेस पर पहुंचे। अंबाला एयरबेस पर वाटर सलूट के साथ पांचों राफेल फाइटर जेट्स का स्वागत किया गया। इन विमानों को वायु सेना की 17वीं स्क्वाड्रन (गोल्डन एरो) में शामिल किया जाएगा।

राफेल को लाने गई टीम में ग्रुप कैप्टन हरकिरत सिंह, एयर कमोडोर हिलाल अहमद राथर, कमोडोर मनीष सिंह और विंग कमांडर अभिषेक त्रिपाठी शामिल थे। ग्रुप कैप्टन हरकिरत सिंह 17 वीं स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरो’ के कमांडिंग ऑफिसर हैं। उन्हे वायु सेना में 21 साल का अनुभव है। वह मिग-21 के पायलट भी रह चुके हैं।

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एक बार उड़ान के दौरान उनकी बाइसन जहाज में आग लग गई। जिसके बाद उन्होंने अपनी सूझ-बूझ का परिचय दिया और विमान की सफल लैंडिंग कराई। हिलाल अहमद राथर जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं। भारतीय वायु सेना में ये बेहतरीन पायलटों की श्रेणी में शामिल हैं।

जम्मू कश्मीर में पढ़ाई पूरी कर 1988 में वायु सेना में लड़ाकू पायलट बने। 1993 में इन्हें फ्लाइट लेफ्टिनेंट बनाया गया, 2004 में विंग कमांडर, 2016 में ग्रुप कैप्टन और 2019 में एयर कोमोडोर बनाए गए। हिलाल अहमद ने अब तक तकरीबन 3000 घंटे उड़ान भरी है, जिसमें मिराज-2000 मिग-21 और किरण एयरक्राफ्ट शामिल हैं।

बलिया में उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव बकवा के रहने वाले मनीष सिंह 2002 में भारतीय वायु सेना में पायलट बने। प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त कर आगे की पढ़ाई उन्होंने सैनिक स्कूल में की। 2017-18 में यह गोरखपुर में तैनात थे। इससे पहले इनकी पोस्टिंग अंबाला और जामनगर में थी।

राफेल डील के बाद मनीष को ट्रेनिंग के लिए फ्रांस भेजा गया था। जालोर, राजस्थान के रहने वाले अभिषेक त्रिपाठी कुश्ती में माहिर हैं। वह अपने दांव पेंच से अच्छे अच्छों को धूल चटा देते हैं। उनकी काबिलियत पर शक नहीं किया जा सकता। इसीलिए उन्हें दुनिया की सबसे बेहतर तकनीक से बना राफेल उड़ाने का मौका मिला।

रोहित कटारिया की ट्रेनिंग पेरिस में हुई है। डेढ़ साल की ट्रेनिंग के बाद उन्हें राफेल लाने के लिए चुना गया। ट्रेनिंग के दौरान ही उन्हें कैप्टन बना दिया गया। राफेल की भारत में सफल लैंडिंग के बाद रोहित ने कैप्टन की कमान संभाली।

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