लखनऊ से जुड़े पाकिस्तानी ड्रोन मामले के तार

पंजाब में पाकिस्‍तान से ड्रोन के जरिये हथियार भेजने के मामले में एक के बाद एक सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे मामले के तार अब लखनऊ के ऐशबाग इलाके से जुड़ रहे हैं। दूसरी ओर, खेमकरण क्षेत्र में जिस पाकिस्‍तानी ड्रोन (Pakistani Drone) से हथियार भेजा गया था वह जली हालत में मिला है और इसे झब्‍बाल नहर से बरामद किया गया है। इसके साथ ही राज्‍य के पूरे बॉर्डर इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। तरनतारन के कस्बा चोहला साहिब के पास 22 सितंबर को स्विफ्ट कार से जा रहे खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (केजेडएफ) के चार आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस मामले के तार अब लखनऊ के ऐशबाग इलाके से जुड़ गए हैं। गिरफ्तार आतंकी बलवंत सिंह उर्फ निहंग और आकाशदीप सिंह रंधावा ऐशबाग इलाके के एक धार्मिक स्थल पर साजिश रचते थे।

यह भी खुलासा हुआ है कि बाबा बलवंत सिंह निहंग मुक्तसर गांव सोहनेवाला निवासी आतंकी जसवंत सिंह काला को हथियारों की सप्लाई करता था। आतंकी काला का संबंध पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या मामले में जेल में बंद आतंकी जगतार सिंह हवारा से है। दोनों काफी करीबी हैं। जसवंत काला भी जेल में बंद है। उसे 2017 में उत्तराखंड के जिला शहीद ऊधम सिंह नगर की पुलिस ने गिरफ्तार किया था। लखनऊ के ऐशबाग इलाके में एक धार्मिक स्थान में रहते हुए बाबा बलवंत सिंह उर्फ निहंग ने आकाशदीप सिंह रंधावा को अपने मिशन से जोड़ा था। माना जा रहा है हथियारों की खेप लाने के मामले में भी यहीं साजिश रखी जाती थी। बलवंत का सीधा संबंध पाकिस्तान में रह रहे आतंकी रणजीत सिंह नीटा के साथ था। जर्मनी में छिपे आतंकी गुरमीत सिंह बग्गा का भाई गुरदेव सिंह मलेशिया से जब डिपोर्ट होकर भारत पहुंचा था, तो उसकी जेल में श्री हरिगोबिंदपुर साहिब (गुरदासपुर) के रहने वाले आतंकी मान सिंह से मुलाकात हुई थी।

मान सिंह को निहंग के नाम से भी जाना जाता है। उसके परिवार की सीधी टक्कर निहंग मुखी बाबा अजीत सिंह पूहला के साथ होती थी। इनके बीच आपस में कई बार गोली भी चलती रही है। सालों पहले निहंग पूहला की जेल में हत्या के बाद मान सिंह निहंग ने अपने संबंध पाकिस्तान से जोड़ लिए थे। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ के इशारे पर रणजीत सिंह नीटा और जर्मनी में रह रहे गुरमीत सिंह बग्गा पंजाब का माहौल बिगाड़ने के लिए केजेडएफ को दोबारा संगठित करने में लगे हुए हैं। पाक से ड्रोन के माध्यम से भेजे गए हथियार ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी बलवंत सिंह के जिम्मे थी। उसने कुबूल किया है नीटा के इशारे पर वह जालंधर के नूरमहल स्थित एक डेरे को उड़ाने की योजना बना रहे थे। इस योजना के तहत वह रेकी करते हुए होशियारपुर, शहीद ऊधम सिंह नगर, जालंधर, गुरदासपुर, अमृतसर व तरनतारन में अपना नेटवर्क बना रहे थे।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बम धमाके करने व जरूरत पड़ने पर अंधाधुंध फायरिंग करके पंजाब में दहशत का माहौल पैदा करने की जिम्मेदारी बलवंत को सौंपी गई थी। जांच में लगी पुलिस को जिला तरनतारन व अमृतसर के आसपास दो और ड्रोन होने के सुराग मिले हैं, जिनके माध्यम से हथियारों की सप्लाई पंजाब आई थी। अब तक पकड़े गए सभी सात आतंकियों के बयान आपस में मेल नहीं खा रहे हैं। माना जा रहा है गुरमीत सिंह बग्गा और रणजीत सिंह नीटा ने हर आतंकी को अपने-अपने काम की ही जिम्मेदारी सौंपी थी। जांच में लगी विशेष टीम ने माझा में अपना अभियान चलाया है। होशियारपुर और शहीद ऊधम सिंह नगर पर भी फोकस किया जा रहा है। पंजाब में बाहर से आकर बसे लोगों में से संदिग्धों पर भी नजर रखी जा रही है।

उधर, आतंकियों ने पाकिस्तान से हथियार लेकर आए जिस ड्रोन को जला कर नष्ट करने की कोशिश की थी, उसके सभी पुर्जे पंजाब पुलिस की खुफिया शाखा ने 29 सितंबर को झब्बाल नहर से बरामद कर लिए। आतंकी आकाशदीप और गुरदेव सिंह को एक बार फिर नहर के पास ले जाया गया। 25 मिनट तक चले इस अभियान में गोताखोरों को जले हुए ड्रोन की तीन आम्र्स (बाजू) और तीन मोटरें मिली हैं। आतंकियों ने ड्रोन और मोटरें जलाने के बाद एक रस्सी से बांध कर नहर में फेंक दी थीं। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि ड्रोन की तीन आर्म्स और पुर्जे 24 सितंबर को तरनतारन के झब्बाल गोदाम से मिले अधजले ड्रोन का ही हिस्सा हैं।

इससे पहले, पुलिस ने 13 अगस्त को अमृतसर (ग्रामीण) के पीएस घरिंडा के मोहवा गांव से भी दुर्घटनाग्रस्त हेक्साकॉप्टर ड्रोन बरामद किया था। गौरतलब है कि 22 सितंबर को स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल व काउंटर इंटेलीजेंस की टीम ने चार आतंकियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से पांच एके-47 व भारी संख्या में असलहा और दस लाख की जाली भारतीय करंसी बरामद की थी। यह सभी हथियार पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से भेजे गए थे। खुफिया शाखा के अधिकारी दोनों आतंकियों आकाशदीप और गुरदेव सिंह को कुछ ऐसी जगहों पर भी लेकर पहुंचे, जहां स्लीपर सेल के साथ उनकी मुलाकात हुई थी, लेकिन आतंकियों की तरफ से बताए गए हुलिये का कोई व्यक्ति वहां नहीं मिला। आतंकियों ने स्वीकार किया था कि सीमा से सटे गांव में एक स्लीपर सेल पकिस्तान से आए संदेश उन तक पहुंचाता था।

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